Monday, February 2, 2026

वेरिकोस वेन्स (Varicose Veins):-नसों की सूजन का साइलेंट खतरा

 वेरिकोस वेन्स (Varicose Veins):-नसों की सूजन का साइलेंट खतरा!🙋


वेरीकोजवेन्स VaricoseVeins उत्कर्ष मनोयोग थेरेपी आयुर्वेदिक उपचार 


🙋दोस्तों वेरिकोस वेन्स केवल पैरों की उभरी, नीली नसें नहीं हैं।

💁‍♂️यह शरीर का एक गंभीर संकेत है कि रक्त सही दिशा में नहीं बह रहा।

अक्सर लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न दिया जाए तो दर्द, सूजन और जटिलताएँ बढ़ सकती हैं।


💁‍♂️ वेरिकोस वेन्स क्या होती हैं?


💁‍♂️हमारी नसों में मौजूद वाल्व खून को ऊपर (दिल की ओर) ले जाते हैं।

जब ये वाल्व कमजोर हो जाते हैं, तो खून नीचे रुकने लगता है👉

➡️ नसें फूल जाती हैं

➡️ नीली, टेढ़ी-मेढ़ी दिखने लगती हैं

👉 इसी स्थिति को Varicose Veins कहते हैं।


⚠️ वेरिकोस वेन्स के मुख्य कारण:-💁‍♂️


🧬 जेनेटिक कारण (परिवार में किसी को हो)


🧍‍♂️ लंबे समय तक खड़े या बैठे रहना


⚖️ अधिक वजन / मोटापा


🤰 गर्भावस्था (हॉर्मोनल बदलाव)


🩸 कमजोर रक्त प्रवाह या पुराने ब्लड क्लॉट


📢 वेरिकोस वेन्स के लक्षण:-


पैरों में भारीपन या सूजन


उभरी हुई, नीली या टेढ़ी-मेढ़ी नसें


जलन, दर्द या झनझनाहट


रात में पैरों में ऐंठन


त्वचा का रंग बदलना या खुजली

आयुर्वेद में वेरिकोस वेन्स को “Siragranthi” या “Siravikriti” कहा गया है।
यह स्थिति वात दोष बढ़ने से होती है, जिससे नसों की लचीलापन और रक्त प्रवाह प्रभावित होता है।

 उत्कर्ष थेरेपी का लक्ष्य होता है —

वात को संतुलित करना

रक्त संचार सुधारना

सूजन और दर्द कम करना

दिव्य  मनोयोग उत्कर्ष थेरेपी उपचार से 
बेहतर रक्त प्रवाह और मांसपेशियों की मज़बूती से वैरिकाज़ नसों का खतरा कम हो सकता है। वैरिकाज़ नसों से होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए आप जब उत्कर्ष  थेरेपी का इस्तेमाल करते हैं, उन्हीं थेरेपी चिकित्सा तरीकों से इन्हें होने से रोका जा सकता है
अधिक विस्तृत जानकारी मार्गदर्शन और स्वास्थ्य देखभाल रोग उपचार परामर्श थेरेपी चिकित्सा के लिए संपर्क करें डॉक्टर सुरेंद्र सिंह विरहे मनोदैहिक स्वास्थ्य आरोग्य विशेषज्ञ आध्यात्मिक मनोयोग थैरेपिस्ट हेल्थ केयर लाईफ कोच
उत्कर्ष मेंटल हेल्थ केयर सॉल्युशंस एंड एंप्लॉयमेंट वेलनेस कंसलटेंसी इंस्टीट्यूट 28/6 साउथ तुकोगंज इंदौर 
9826042177

Friday, January 30, 2026

मनोयोग – मन, मस्तिष्क और आत्मा का वैज्ञानिक योग

 🌿 मनोयोग – मन, मस्तिष्क और आत्मा का वैज्ञानिक योग 🌿

मनोयोग अर्थात मनो-निग्रह —

जिसे महर्षि पतंजलि ने अपने योगसूत्रों में

“चित्तवृत्ति निरोधः” के रूप में प्रतिपादित किया।


उसी प्राचीन योग परंपरा को

डॉक्टर सुरेंद्र सिंह विरहे

(मनोदैहिक स्वास्थ्य आरोग्य विशेषज्ञ एवं आध्यात्मिक मनोयोग थैरेपिस्ट)

ने उत्कर्ष मनोयोग थेरेपी के रूप में

आधुनिक, नैदानिक एवं शोध-आधारित चिकित्सा समाधान के रूप में विकसित किया है।


🧠 मानव मस्तिष्क – प्रकृति की अद्भुत रचना

मानव मस्तिष्क तन का सबसे जटिल और आवश्यक अंग है—

यह बिल्कुल महाभारत के चक्रव्यूह जैसा है।


🔹 लगभग 100 करोड़ तंत्रिका कोशिकाएं

🔹 प्रत्येक कोशिका के 10,000 से अधिक न्यूरल कनेक्शन

🔹 इच्छाएं, संवेग, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, चेतना, ज्ञान और व्यक्तित्व — सबका केंद्र


मस्तिष्क प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से

शरीर की सभी क्रियाओं को नियंत्रित करता है।


😴 नींद और इम्युनिटी का गहरा संबंध

प्रसिद्ध ब्रेन साइंटिस्ट मैट वॉकर

अपनी पुस्तक “Why We Sleep” में बताते हैं—

👉 नींद पूरी न होने पर अगले दिन इम्युनिटी 70% तक घट जाती है।


🧬 “मस्तिष्क नाड़ी संहिता” के अनुसार—

गहरी नींद से ही


जीवनीय शक्ति


रोग प्रतिरोधक क्षमता


नैचुरल किलर सेल्स सक्रिय रहते हैं


दिन में सोना और रात में अपर्याप्त नींद

इन किलर सेल्स की कार्यक्षमता को कम कर देती है।


🌙 मनोयोग थेरेपी की योगनिद्रा

✔ मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाए

✔ नींद की कमी को प्राकृतिक रूप से पूरा करे

✔ मानसिक तनाव, चिंता व थकान में राहत

✔ मनोदशा संतुलन और माइंड पावर में वृद्धि


🌸 स्वस्थ जीवन • सर्वांगीण विकास • आध्यात्मिक उन्नति

मन, शरीर और आत्मा की

आधी-व्याधियों व मनोदैहिक रोगों से

समूल मुक्ति हेतु

आज ही लें मनोयोग थेरेपी चिकित्सा समाधान परामर्श।


📞 संपर्क करें

डॉ. सुरेंद्र सिंह विरहे

मनोदैहिक स्वास्थ्य आरोग्य विशेषज्ञ

आध्यात्मिक मनोयोग थैरेपिस्ट


उत्कर्ष मेंटल हेल्थ केयर सॉल्युशंस

डिवाइन लाइफ सॉल्युशंस एंड एम्प्लॉयमेंट वेलनेस कंसलटेंसी इंस्टीट्यूट


📍 28/6, साउथ तुकोगंज, इंदौर

📱 8989832149 | 9826042177

Monday, January 19, 2026

हमारे शरीर में भी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (Electromagnetic Field - EMF) बनता है।

 

​विज्ञान इसे बायोइलेक्ट्रिसिटी (Bioelectricity) या बायोमैग्नेटिज्म (Biomagnetism) कहता है। जहाँ भी बिजली (Electrical Current) होती है, वहाँ मैग्नेटिक फील्ड अपने आप बन जाता है। चूँकि हमारा शरीर कोशिकाओं (cells) के बीच संदेश भेजने के लिए बिजली का उपयोग करता है, इसलिए हमारे शरीर के आसपास भी एक बहुत ही सूक्ष्म (weak) चुंबकीय क्षेत्र बनता है।


यह मुख्य रूप से शरीर के इन हिस्सों में पाया जाता है:

1. दिल (The Heart) - सबसे शक्तिशाली स्रोत

हमारे शरीर में सबसे मजबूत इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड हमारे दिल (Heart) का होता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, दिल का इलेक्ट्रिक फील्ड दिमाग के फील्ड की तुलना में लगभग 60 गुना और मैग्नेटिक फील्ड 5000 गुना अधिक शक्तिशाली होता है।

यह फील्ड शरीर से कई फीट दूर तक मापा जा सकता है। इसीलिए वैज्ञानिक इसे SQUID (Superconducting Quantum Interference Device) जैसे अति-संवेदनशील यंत्रों से मापते हैं।

2. दिमाग (The Brain)

हमारा दिमाग अरबों न्यूरॉन्स (Neurons) से बना है जो लगातार बिजली के संकेतों (Electrical Signals) के जरिए आपस में बात करते हैं।

यह गतिविधि भी एक मैग्नेटिक फील्ड बनाती है, हालांकि यह दिल की तुलना में बहुत कमजोर होता है।

डॉक्टर इसी फील्ड को मापने के लिए EEG (Electroencephalogram) या MEG (Magnetoencephalography) टेस्ट का उपयोग करते हैं।

3. नर्वस सिस्टम और मांसपेशियां

जब भी आप अपना हाथ हिलाते हैं या कोई काम करते हैं, तो आपकी नसों (Nerves) और मांसपेशियों में आयन्स (Ions - जैसे सोडियम और पोटेशियम) का प्रवाह होता है। यह प्रवाह भी एक हल्का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।

यह बनता कैसे है?

हमारे शरीर की कोशिकाएं (Cells) छोटी बैटरियों की तरह काम करती हैं। उनके अंदर और बाहर सोडियम (Na+), पोटेशियम (K+) और कैल्शियम जैसे चार्ज्ड पार्टिकल्स (Charged Particles) चलते रहते हैं। इस "आवेशों के प्रवाह" (Flow of Charge) से ही बिजली बनती है, और इसी बिजली से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड पैदा होता है।

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 आध्यात्मिक साधनाओं (जैसे ध्यान, मंत्र जाप और योग) का हमारे शरीर के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (Electromagnetic Field) पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

विज्ञान और आध्यात्म दोनों इसे अलग-अलग नजरिए से समझाते हैं, लेकिन निष्कर्ष एक ही है—साधना से यह फील्ड 'संतुलित' और 'शक्तिशाली' होता है।

इसे समझने के लिए यहाँ तीन मुख्य वैज्ञानिक प्रमाण दिए गए हैं:

1. "हार्ट कोहेरेंस" (Heart Coherence) - सबसे बड़ा सबूत

हार्टमैथ इंस्टीट्यूट (HeartMath Institute) की रिसर्च के अनुसार, जब आप ध्यान करते हैं या सकारात्मक भावना (जैसे कृतज्ञता या भक्ति) में होते हैं, तो आपके दिल की धड़कन की लय बदल जाती है।

 * सामान्य अवस्था: जब हम तनाव में होते हैं, तो दिल का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड "बिखरा हुआ" (Incoherent) होता है।

 * साधना के दौरान: जब आप गहरा ध्यान या प्रार्थना करते हैं, तो दिल की तरंगें एक सुसंगत लय (Coherent Rhythm) में आ जाती हैं। इस अवस्था में दिल का चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) बड़ा और अधिक शक्तिशाली हो जाता है, जिसे शरीर के बाहर 3-4 फीट तक मापा जा सकता है।

2. मंत्र जाप और 'ओम्' का प्रभाव (Vibration & Resonance)

मंत्र जाप (जैसे 'ओम्' या 'महामृत्युंजय मंत्र') सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह शरीर में कंपन (Vibration) पैदा करता है।

 * वेगस नर्व (Vagus Nerve): मंत्रों का उच्चारण गले और कान के पास 'वेगस नर्व' को उत्तेजित (stimulate) करता है। यह नर्व सीधे आपके दिमाग और दिल के इलेक्ट्रिक सिग्नल्स को कंट्रोल करती है।

 * ब्रेनवेव्स (Brainwaves): 'ओम्' का जाप दिमाग को 'बीटा' (तनाव) स्टेट से 'अल्फा' (शांति) और 'थीटा' (गहरा ध्यान) स्टेट में ले जाता है। जब दिमाग शांत होता है, तो शरीर का बायो-इलेक्ट्रिक फील्ड (Bio-electric field) व्यवस्थित हो जाता है।

3. प्राण और बायो-फोटन्स (Biophotons)

हमारे शरीर की कोशिकाएं (Cells) बहुत हल्का प्रकाश छोड़ती हैं जिसे बायो-फोटन्स कहते हैं।

 * कुछ वैज्ञानिक प्रयोगों (जैसे GDV कैमरा या किर्लियन फोटोग्राफी) में देखा गया है कि जो लोग नियमित साधना (योग/प्राणायाम) करते हैं, उनके शरीर से निकलने वाले इस प्रकाश (जिसे कुछ लोग आभामंडल या Aura कहते हैं) में अधिक चमक और संतुलन होता है।

 * प्राणायाम (Breathing exercises) शरीर में ऑक्सीजन और आयन्स (Ions) का प्रवाह बढ़ाता है, जिससे शरीर की 'इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी' (विद्युत प्रवाह क्षमता) बेहतर होती है।

निष्कर्ष

साधना आपके शरीर के अंदर की "बिजली" (Bio-electricity) को एक लय में लाती है। जैसे एक लेज़र लाइट (Laser light) साधारण लाइट से ज्यादा शक्तिशाली होती है क्योंकि उसकी तरंगें एक साथ चलती हैं, वैसे ही साधना से आपका इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड एकाग्र (Focused) और शक्तिशाली हो जाता है।

Tuesday, August 12, 2025

Divine Life Solutions' research-based psychotherapy is a vital option for OCD

 Divine Life Solutions' research-based psychotherapy is a vital option for OCD.

Yoga, along with psychotherapy and medications, can help manage OCD symptoms.

Psychotherapy helps reduce stress and anxiety.

Divine Life Solutions Psychiatry Spiritual Health Care Counseling Healing Solutions increases self-awareness, helping you understand your thoughts and feelings.

Manoyoga Manonigraha Utkarsha Yoga improves the physical balance, which is helpful in controlling the symptoms of OCD.

Psychotherapy guided classes conducted by Dr. Surendra Singh Virhe, psychosomatic health specialist, give patients an opportunity to support each other.

Yoga, combined with conventional medicine, may be effective in reducing OCD symptoms.

Regular yoga practice helps manage the symptoms of OCD.

Techniques like pranayama and shavasana are helpful in reducing stress.

For more information, contact Dr. Surendra Singh Virhe Psychosomatic Well-Being Spiritual Mental ental Health Specialist Spiritual YogaTherapist Life Coach ManoYog Divine Life Solutions Mobile 9826042177

Tuesday, June 17, 2025

नारियलपानी स्वास्थ्य के लाभ

 #NariyalPani जब बात स्वास्थ्य की आती है, तो हमें सबसे पहले याद आता है — ताजगी, पोषण और प्राकृतिक उपचार। ऐसे में नारियल पानी (Coconut Water) एक ऐसा उपहार है, जो किसी औषधि से कम नहीं। खासकर मरीज़ों के लिए यह एक संजीवनी बूटी जैसा कार्य करता है। आयुर्वेद में इसे "सहज आयुर्वेदिक टॉनिक" कहा गया है। गर्मी हो या बीमारी — नारियल पानी है ताजगी की तैयारी!


🌴 क्या है नारियल पानी?


नारियल पानी हरे नारियल के अंदर पाया जाने वाला पारदर्शी, मीठा और ठंडक देने वाला तरल होता है। यह पूरी तरह प्राकृतिक, कम कैलोरी वाला और भरपूर इलेक्ट्रोलाइट्स, मिनरल्स और विटामिन्स से युक्त होता है।


💡 क्यों है यह मरीज़ों के लिए औषधि?


1. तेज़ बुखार और डिहाइड्रेशन में अमृत समान


बुखार, दस्त या उल्टी के दौरान शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है। नारियल पानी इस कमी को तेजी से पूरा करता है और शरीर को ठंडक प्रदान करता है।


2. किडनी रोगियों के लिए लाभकारी


नारियल पानी में पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है और सोडियम की कम। यह किडनी को डिटॉक्स करने में मदद करता है और पेशाब के रास्ते विषैले तत्त्वों को बाहर निकालता है।


3. डायबिटीज़ मरीज़ों के लिए सुरक्षित


नारियल पानी में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह ब्लड शुगर को अचानक नहीं बढ़ाता। यह मधुमेह पीड़ितों के लिए भी एक सुरक्षित प्राकृतिक पेय है।


4. हृदय रोग में लाभकारी


पोटैशियम से भरपूर नारियल पानी हृदय की धड़कन को संतुलित करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखता है। इसमें कोई कोलेस्ट्रॉल नहीं होता।


5. लीवर की सुरक्षा में सहायक


लीवर डिटॉक्स में नारियल पानी अत्यंत सहायक है। यह लीवर को साफ करता है, जिससे पाचन और ऊर्जा निर्माण की प्रक्रिया बेहतर होती है।


6. गैस्ट्रिक व अम्लपित्त रोगियों के लिए वरदान


जिन्हें एसिडिटी, गैस या जलन की शिकायत रहती है, उनके लिए नारियल पानी का नियमित सेवन शीतलता और राहत प्रदान करता है।


7. त्वचा रोग व संक्रमण में प्रभावी


त्वचा पर मुंहासे, रैशेज़, या खुजली की समस्या हो तो नारियल पानी का सेवन और त्वचा पर उसका प्रयोग दोनों लाभदायक हैं।


🧪 आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?


इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर: इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, और सोडियम पाए जाते हैं।


कम कैलोरी: 100ml में लगभग 19 कैलोरी।


बायोएक्टिव एंज़ाइम्स: जो पाचन में सहायक होते हैं।


एंटीऑक्सीडेंट गुण: शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं।


🕐 कब और कैसे करें सेवन?


सुबह खाली पेट: शरीर को हाइड्रेट करने और टॉक्सिन्स बाहर निकालने के लिए सबसे अच्छा समय।


बुखार/उल्टी-दस्त में: हर 3-4 घंटे में एक गिलास नारियल पानी लेना अत्यंत लाभदायक है।


एक्सरसाइज के बाद: इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस के लिए आदर्श विकल्प।


⚠️ सावधानियाँ


किडनी में पोटैशियम की अधिकता वाले मरीज़ इसे सीमित मात्रा में लें।


जिनका ब्लड शुगर बहुत असंतुलित है, वे डॉक्टर से परामर्श करें।


दिन में 1 से 2 नारियल से अधिक सेवन न करें।


🥥 नारियल के अनजाने तथ्य:

🌱 नारियल एक 'ड्रूप' फल है, न कि सामान्य नट। यह आम, जैतून और खुबानी की तरह एक सिंगल-सीडेड फल होता है।


💧 नारियल पानी पूरी तरह से स्टरलाइज़ (Sterile) होता है। इसलिए आपातकालीन परिस्थितियों में इसका उपयोग IV ड्रिप के रूप में भी किया गया है (विशेषकर युद्धकाल में)।


🧬 नारियल के पानी में पाई जाती है मानव प्लाज्मा से मिलती-जुलती संरचना, इसलिए यह शरीर में तेजी से अवशोषित हो जाता है।


🔥 नारियल का तेल प्राकृतिक SPF (सूरज से सुरक्षा) देता है। यह त्वचा को धूप से कुछ हद तक बचाता है (SPF 4 तक)।


💊 नारियल के तेल में लॉरिक एसिड पाया जाता है, जो बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में मदद करता है – यह वही एसिड है जो माँ के दूध में होता है।


🥗 नारियल के गोले (मालाई) से शाकाहारी दूध (Coconut Milk) और दही भी तैयार होती है — जो वेगन डाइट वालों के लिए सुपरफूड मानी जाती है।


🌍 नारियल का पेड़ 'Tree of Life' कहलाता है — इसकी जड़, पत्ते, फल, तना और पानी तक हर चीज़ का कोई न कोई औषधीय या उपयोगी पहलू होता है।


🏝️ नारियल समुद्र के सहारे खुद को फैलाता है। इसका कठोर खोल इसे लम्बे समय तक पानी में तैरने और दूर-दराज के द्वीपों तक पहुँचने में मदद करता है।


🌟 निष्कर्ष


नारियल पानी न केवल स्वादिष्ट और ताजगी देने वाला पेय है, बल्कि यह अनेक रोगों में औषधि के रूप में कार्य करता है। यह शरीर को अंदर से शुद्ध करता है, इम्यून सिस्टम को मज़बूत करता है और रिकवरी की गति को तेज करता है। मरीज़ों के लिए यह एक सस्ता, सुलभ और असरदार विकल्प है जिसे रोज़ाना सेवन में शामिल किया जा सकता है।


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आयुर्वेदिक शतावरी_महिलाओं_के_लिए

 #Shatavari आज की तेज रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली ने महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है। पीसीओएस (PCOS), अनियमित मासिक धर्म, हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन समस्याएं हर उम्र की महिलाओं में सामान्य होती जा रही हैं। ऐसे समय में जब दवाओं के दुष्प्रभाव आम हैं, आयुर्वेद एक शांत और सुरक्षित विकल्प प्रस्तुत करता है — शतावरी के रूप में।


शतावरी (Shatavari), आयुर्वेद में महिलाओं की "रानी औषधि" कही जाती है। इसके चमत्कारी गुण न केवल हार्मोन संतुलन को बहाल करते हैं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को समग्र रूप से पोषण भी देते हैं।


🌱 शतावरी क्या है?

शतावरी (Asparagus racemosus) एक झाड़ीदार पौधा है, जिसकी जड़ें औषधीय रूप से अत्यंत उपयोगी मानी जाती हैं। संस्कृत में इसका अर्थ है — "जो सौ पतियों को भी संतुष्ट कर सके", जो इसकी प्रजनन स्वास्थ्य पर प्रभावशीलता को दर्शाता है।


प्राकृतिक गुणधर्म:


स्वाद में मधुर व तिक्त


गुण में गुरु व स्निग्ध


शीतल, बल्य, स्तन्यजनक (दूध बढ़ाने वाली), रसायन


🚺 महिलाओं के लिए क्यों अमृत समान है शतावरी?

1. PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) में कारगर

हार्मोनल संतुलन में मदद करती है


ओवरी में सिस्ट बनने की प्रक्रिया को धीमा करती है


एंटी-एंड्रोजेनिक गुणों से फेशियल हेयर ग्रोथ और मुहांसे में राहत


✅ आयुर्वेद में शतावरी का उपयोग नारीगंधा और लोध्र जैसे अन्य हर्ब्स के साथ पीसीओएस के लिए किया जाता है।


2. अनियमित मासिक धर्म (Irregular Periods)

मासिक धर्म चक्र को नियमित बनाती है


गर्भाशय की मांसपेशियों को पोषण देती है


दर्द और भारी रक्तस्राव में राहत


✔️ शीतल, रक्तशोधक, और वात-पित्त शामक होने के कारण यह मासिक धर्म को संतुलित करने में उपयोगी है।


3. प्रजनन क्षमता (Fertility) बढ़ाने में सहायक

ओव्यूलेशन सुधारती है


गर्भाशय को स्वस्थ रखती है


गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाती है


👉 शतावरी को आयुर्वेदिक गर्भवृद्धि योग (Fertility boosting formula) में प्रमुख घटक के रूप में प्रयोग किया जाता है।


4. गर्भावस्था में लाभकारी

गर्भधारण के बाद गर्भस्थ पौष्टिक के रूप में काम करती है


शिशु की वृद्धि के लिए आवश्यक पोषण प्रदान करती है


Morning sickness और गर्भाशय संकुचन में राहत


5. स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए

शतावरी स्तन्यजनक (Galactagogue) है


दूध की मात्रा व गुणवत्ता दोनों में सुधार लाती है


✅ WHO द्वारा सुझाए गए नेचुरल Lactation Boosters में शतावरी शीर्ष पर है।


🔬 वैज्ञानिक दृष्टिकोण

आधुनिक विज्ञान ने भी शतावरी के लाभों को प्रमाणित किया है:


लाभ वैज्ञानिक पुष्टि

हार्मोन संतुलन एस्ट्रोजनिक एक्टिविटी सिद्ध

गर्भाशय की ताकत Anti-oxytocic प्रभाव से संकुचन कम

इम्यूनिटी इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण

एंटीऑक्सीडेंट मुक्त कणों को निष्क्रिय करता है


🌸 शतावरी के अन्य लाभ (Beyond Gynaecology)

तनाव कम करना


कामेच्छा में वृद्धि


रजोनिवृत्ति (Menopause) में राहत


त्वचा और बालों में चमक


कब्ज और एसिडिटी में उपयोगी


🍵 सेवन के रूप

1. शतावरी चूर्ण (Powder)

3–5 ग्राम रोज दूध के साथ


पीसीओएस व मासिक धर्म चक्र के लिए लाभकारी


2. शतावरी गोली / टैबलेट्स

बाजार में आयुर्वेदिक कंपनियों द्वारा उपलब्ध


नियमित सेवन से लंबे समय तक प्रभाव


3. शतावरी कल्प (Shatavari Kalpa)

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए


स्वादिष्ट, पौष्टिक और ऊर्जा वर्धक


4. काढ़ा (Decoction)

ताजे जड़ों से तैयार किया जाता है


शरीर को ठंडक और शक्ति देता है


⚠️ सावधानियां

ध्यान दें कारण

अधिक मात्रा से बचें हार्मोनल ओवरस्टिमुलेशन हो सकता है

गर्भपात का इतिहास हो डॉक्टर की सलाह आवश्यक

थाइरॉइड / हार्मोन डिसऑर्डर हो सलाह लेकर लें

डिब्बाबंद शतावरी उत्पाद केवल प्रमाणित ब्रांड्स चुनें


👩‍⚕️ किन महिलाओं को इसका उपयोग ज़रूर करना चाहिए?

✅ जिनका मासिक धर्म अनियमित है

✅ जिन्हें बार-बार miscarriage होता है

✅ जो गर्भधारण में कठिनाई अनुभव करती हैं

✅ Menopause से गुजर रहीं महिलाएं

✅ Post-partum कमजोरी झेल रहीं माताएं


📚 आयुर्वेदिक ग्रंथों में क्या कहता है शतावरी के बारे में?

चरक संहिता: “स्त्री रसायन में श्रेष्ठ”


भावप्रकाश निघण्टु: स्तन्यवर्धक, गर्भधारण कारक, शीतल


अष्टांग हृदयम्: संतान हेतु पुष्टिकारक औषधि


🌷 नारी शक्ति के लिए प्रकृति का वरदान

शतावरी केवल औषधि नहीं है, बल्कि यह एक नारी स्वास्थ्य का आधार स्तंभ है। यह न केवल महिलाओं को उनके जीवन के हर चरण में शक्ति प्रदान करती है, बल्कि उन्हें उनके स्त्रीत्व की गरिमा के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है।


📣 निष्कर्ष:

“जहाँ रसायन नहीं काम करते, वहाँ आयुर्वेद का शतावरी रस स्त्री स्वास्थ्य को फिर से जीवन दे सकता है।”


इस बदलते समय में, जहां युवा महिलाएं PCOS से लड़ रही हैं, मातृत्व की राह में संघर्ष कर रही हैं, वहाँ शतावरी एक प्राकृतिक चमत्कार बनकर उभरी है। यह शरीर की जड़ों तक जाकर कार्य करती है और संपूर्ण पुनरुद्धार करती है।


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Monday, June 16, 2025

सांस संबंधी बीमारियों (Respiratory Diseases)

 आज की बदलती जीवनशैली, प्रदूषण और वायरल इंफेक्शन के बढ़ते प्रकोप ने लोगों में सांस संबंधी बीमारियों (Respiratory Diseases) की संख्या बढ़ा दी है। इन रोगों में अस्थमा, खांसी, ब्रोंकाइटिस, बलगम जमा होना, और सांस फूलना आम समस्याएं बन चुकी हैं। जहां आधुनिक चिकित्सा में इनका इलाज दवाओं और इनहेलर्स के माध्यम से किया जाता है, वहीं आयुर्वेद में एक चमत्कारी जड़ी-बूटी है — वासा (Vasa या मालाबार नट), जिसे इन समस्याओं के लिए वरदान माना गया है।


🌿 वासा क्या है?


वासा (Botanical Name: Adhatoda vasica) एक झाड़ीदार पौधा है जो पूरे भारतवर्ष में पाया जाता है। इसे आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है — वासक, वासक पुष्पी, अड़ूसा आदि। इसका प्रयोग हज़ारों वर्षों से श्वसन तंत्र के रोगों के इलाज में होता आया है।


🔬 वासा का आयुर्वेदिक गुणधर्म:


रस (स्वाद): तिक्त (कड़वा)


गुण: लघु (हल्का), रूक्ष (शुष्क)


वीर्य: शीत (ठंडा)


दोष प्रभाव: कफ-पित्त शामक


🫁 श्वसन रोगों में वासा के चमत्कारी लाभ:


1. खांसी और बलगम में राहत:


वासा में उपस्थित तत्व बलगम को ढीला करने और बाहर निकालने में सहायक होते हैं। यह एक उत्तम एक्सपेक्टोरेंट (बलगम निकालने वाला) है।


2. ब्रोंकाइटिस और अस्थमा:


वासा ब्रोंकाईल ट्यूब्स को खोलने में मदद करता है और अस्थमा के मरीजों को राहत प्रदान करता है। इसका नियमित सेवन सांस फूलने की समस्या को कम करता है।


3. टीबी और पुरानी खांसी में फायदेमंद:


वासा का काढ़ा या अर्क तपेदिक (टीबी) के इलाज में भी उपयोगी पाया गया है। यह फेफड़ों को साफ करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।


4. गले की खराश और सूजन में आराम:


वासा के पत्तों का काढ़ा पीने से गले में सूजन, खराश और जलन जैसी समस्याएं कम होती हैं।


🏡 घरेलू नुस्खे (Home Remedies with Vasa):


✅ 1. वासा का काढ़ा:


सामग्री:


वासा के ताजे पत्ते (4–5)


तुलसी के पत्ते (4–5)


अदरक (1 टुकड़ा)


2 कप पानी


विधि:

सभी चीज़ों को पानी में डालकर आधा रह जाने तक उबालें। गुनगुना होने पर छानकर पिएं।


लाभ: खांसी, बलगम, अस्थमा और गले की समस्याओं में लाभकारी।


✅ 2. वासा अर्क और शहद:


वासा अर्क (5–10 ml) में शुद्ध शहद मिलाकर दिन में दो बार लें।


बच्चों को 2.5 ml ही देना चाहिए।


लाभ: बलगम साफ करने, सांस खोलने और गले के लिए फायदेमंद।


✅ 3. वासा का चूर्ण:


सूखे पत्तों को पीसकर चूर्ण बना लें।


1 चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी या शहद के साथ दिन में 2 बार लें।


लाभ: अस्थमा और क्रॉनिक कफ में असरदार।


⚠️ सावधानियां:


गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं चिकित्सक की सलाह से ही इसका उपयोग करें।


अधिक मात्रा में सेवन से दस्त या पेट दर्द हो सकता है।


🧘 जीवनशैली में बदलाव:


वासा का असर तब और बेहतर होता है जब साथ में आप कुछ जीवनशैली बदलाव भी करें:


धूल/धुएं से बचें


धूम्रपान बंद करें


योग में अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम करें


गर्म पानी पिएं और ठंडे पेय से बचें


⚠️ किन बीमारियों में वासा का सेवन नहीं करना चाहिए?

1. अत्यधिक ठंडी प्रकृति वाले व्यक्तियों को:

वासा शीत वीर्य (ठंडी तासीर) वाला होता है। ऐसे में जिन लोगों का शरीर पहले से ही ठंडी प्रकृति का है, उन्हें इसके सेवन से गैस, पाचन कमजोरी या जुकाम की समस्या हो सकती है।


2. डायरिया (दस्त) या अतिसार में:

वासा की तासीर ठंडी होती है और यह रूक्ष (सूखा) गुण वाला है। अतिसार, पतले दस्त या अपच में इसका सेवन करने से समस्या बढ़ सकती है।


3. लो बीपी या शरीर में कमजोरी वाले मरीजों को:

वासा शरीर को ठंडक देता है और कभी-कभी अत्यधिक सेवन से शरीर में थकावट या कमजोरी महसूस हो सकती है, विशेषकर जब ब्लड प्रेशर पहले से ही कम हो।


4. गर्भवती महिलाओं को:

वासा गर्भाशय को संकुचित करने वाले गुण रखता है। इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान इसका सेवन डॉक्टर की निगरानी में ही करना चाहिए। यह विशेषकर पहले और तीसरे तिमाही में टालना चाहिए।


5. अत्यधिक शुष्क खांसी (Dry Cough) में सावधानी:

जहाँ यह बलगम वाली खांसी (Wet Cough) में बेहतरीन है, वहीं बिना बलगम की सूखी खांसी में कभी-कभी जलन या सूखापन बढ़ा सकता है।


🌦️ वासा किस मौसम में नहीं लेना चाहिए?

❄️ ज्यादा ठंड के मौसम (Peak Winter) में:

वासा की ठंडी तासीर के कारण ठंड के मौसम में यह जुकाम या शीत प्रकृति की समस्याएँ बढ़ा सकता है।


यदि लेना ही हो, तो तुलसी, अदरक, काली मिर्च के साथ लेना चाहिए।


☀️ गर्मियों में संतुलित मात्रा में लें:

गर्मियों में भी इसका ठंडा प्रभाव कुछ लोगों को अधिक ठंडक दे सकता है जिससे कमजोरी या सुस्ती महसूस हो सकती है।


ऐसे में भी वासा का सेवन हल्दी या शहद के साथ करना अच्छा रहता है।


✅ निष्कर्ष:


वासा एक प्राकृतिक और आयुर्वेदिक औषधि है, जो श्वसन तंत्र को मजबूत करती है और शरीर से कफ दोष को दूर करती है। यह केवल लक्षणों को नहीं, बल्कि रोग की जड़ को ठीक करने का सामर्थ्य रखती है। सही मात्रा, विधि और समय के साथ इसके सेवन से आप सांस की समस्याओं से स्थायी राहत पा सकते हैं।


आयुर्वेद कहता है — “प्राकृतिक जीवन अपनाओ, रोगों से दूर रहो।”


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Sunday, June 15, 2025

सात्विक भोजन खानपान के लाभ

 सात्त्विक आहार (Satvik Diet) योगिक जीवनशैली का एक अहम हिस्सा है। यह शुद्ध, हल्का, और संतुलित भोजन होता है जो शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करने वाला माना जाता है।


आहार (भोजन) का उद्देश्य आयु को बढाना, मस्तिष्क को शुद्ध करना तथा शरीर को शक्ति पहुँचाना है । इसका यही एकमात्र उद्देश्य है । प्राचीन काल में विद्वान् पुरुष ऐसा भोजन चुनते थे, जो स्वास्थ्य तथा आयु को बढ़ाने वाला हो।


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आयुः सत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः।

रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृद्या आहारा सात्त्विकप्रियाः॥(17.8. भगवद्गीता )


जो भोजन सात्त्विक व्यक्तियों को प्रिय होता है, वह आयु बढ़ाने वाला, जीवन को शुद्ध करने वाला तथा बल, स्वास्थ्य, सुख तथा तृप्ति प्रदान करने वाला होता है ।ऐसा भोजन रसमय, स्निग्ध, स्वास्थ्य प्रद तथा हृदय को भाने वाला होता है ।


यह श्लोक सात्विक आहार के महत्व को दर्शाता है। सात्विक आहार वे भोजन हैं जो शरीर, मन और आत्मा के लिए अच्छे होते हैं और जो व्यक्ति को स्वस्थ, शांत और खुश रखते हैं।


योग के साथ साथ आहार का भी बहुत बड़ा महत्त्व है हमारे स्वस्थ और खुशहाल जीवन के लिए इसलिए संतुलित और सात्विक भोजन लेना चाहिए ।


अगर आपका आहार ठीक नहीं होगा तो योग का ज़्यादा से ज़्यादा लाभ नहीं मिल पाएगा । आहार ठीक है तो सब ठीक 

है क्यूंकि आहार हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है जो दैनिक जीवन के लिए बहुत ज़रूरी है । अगर आप योग करते है और आहार आपका ठीक नहीं है तो आपको जो लाभ मिलना चाहिए वो नहीं मिलेगा इसलिए कहते हैं :- 


जब आहार गलत हो, तो दवा का कोई फायदा नहीं होता। जब आहार सही हो, तो दवा की कोई जरूरत नहीं होती।”


अच्छा खाएं, स्वस्थ रहें 🧘😊

" जैसा आहार वैसा मन"।

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🌿 सात्त्विक आहार के प्रमुख फायदे (लाभ):


1. मन की शांति और एकाग्रता बढ़ती है:-


 • सात्त्विक आहार में हल्का, सुपाच्य और ताजा भोजन होता है जो मानसिक स्थिरता और सकारात्मक सोच लाता है।

 • ध्यान और योग के अभ्यास में सहायता करता है।


2. शरीर को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करता है:-


 • यह शरीर को पोषण देने वाले तत्वों से भरपूर होता है (जैसे फल, दूध, घी, हरी सब्जियाँ, अंकुरित अनाज)।


 • थकान कम होती है, और शरीर हल्का और सक्रिय महसूस करता है।


3. पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है:-


 • आसानी से पचने वाला होता है, कब्ज, गैस, और एसिडिटी जैसी समस्याओं से बचाता है।


4. रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत करता है:-

 • ताजे और प्राकृतिक खाद्य पदार्थ शरीर को विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स देते हैं जो बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।


5. योग और आध्यात्मिक साधना में सहायक:-


 • योगाभ्यासियों और साधकों के लिए यह आहार विशेष लाभकारी माना गया है क्योंकि यह मन को स्थिर और शरीर को स्वच्छ रखता है।


6. कर्म, विचार और व्यवहार को शुद्ध करता है:-


 • जैसा आहार, वैसा विचार — सात्त्विक भोजन से व्यक्ति का स्वभाव शांत, करुणामय और संयमी बनता है।


**** सात्त्विक आहार (Sattvic Aahar) न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन और आत्मा को भी शांत और शुद्ध करता है। यह आयुर्वेद और योगशास्त्र में अत्यंत प्रशंसित आहार है।*****


 अच्छा खाएं और स्वस्थ व निरोगी रहें 🍛🧘‍♀️😊🌸


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Saturday, June 14, 2025

यूरिक एसिड के लक्षण उपचार

 *यूरिक एसिड क्यों बढ़ता है :-शरीर में प्यूरिन के टूटने के कारण यूरिक एसिड बनता है, जो किड्नी तक खून से पहुँचता है और मूत्र मार्ग से शरीर से बाहर निकल जाता है. किसी वजह से जब ये बाहर नहीं निकलता तब ये शरीर के अंदर इकठ्ठा होने लगता है और एक क्रिस्टल की तरह बन जाता है और जब यूरिक एसिड का स्तरअधिक हो जाता है तब ये परेशानी करने लगता है


*यूरिक एसिड के लक्षण :- इस रोग के बारे में ज्यादातर लोगों को जादा कुछ पता नहीं होता. अक्सर हम शुरुआती लक्षण देख कर बीमारी का आइडिया लगा लेते है, जैसे पैरों के अंगूठे में सूजन पड़ना, जोडों में दर्द और सूजन होना, उठते बैठते वक़्त घुटने में दर्द,जोड़ों में गाँठ की शिकायत होना.


*आइये जाने आयुर्वेद में इसके घरेलु उपचार।*


*1.लौकी:-* अगर लौकी का मौसम हो तो सुबह खाली पेट लौकी (घीया, दूधी) का जूस निकाले एक गिलास इस में 5-5 पत्ते तुलसी और पुदीना के भी डाल ले, अब इसमें थोड़ा सेंधा नमक मिला ले। और इसको नियमित पिए कम से कम 30 से 90 दिन तक।


*2. अर्जुन की छाल :–* रात को सोते समय डेढ़ गिलास साधारण पानी में अर्जुन की छाल का चूर्ण एक चम्मच और दाल चीनी पाउडर आधा चम्मच डाल कर चाय की तरह पकाये और थोड़ा पकने पर छान कर निचोड़ कर पी ले। ये भी 30 से 90 दिन तक करे।


*3. चोबचीनी:-* चोबचीनी का आधा चम्मच सवेरे खाली पेट और रात को सोने के समय पानी से लेने पर कुछ दिनों में यूरिक एसिड खत्म हो जाता है।


*4. पपीता :–* एक कच्चा हरा पपीता अंदाजा एक किलो तक के वजन का ले कर अच्छी तरह धो लें।फिर समेत छिलके उसके छोटे छोटे पीस काट लें।फिर किसी पतीले में डाल कर इस में तीन किलो पानी मिला दें और इस में पांच पैकेट ग्रीन टी (या किसी कपड़े में बांधकर दो बड़े चम्मच) के डाल कर 15 मिनट तक चाय की तरह उबालकर इसे छान लें।पूरा दिन यही पानी पीना है।अंदाजा 5 से 6 गिलास । 14 दिन लगातार पीने से यूरिक एसिड खत्म हो जाता है। 14 दिन लगातार प्रयोग करने के बाद जब टेस्ट वगैरह नार्मल हो जाएं तो बाद में 7 दिन में एक बार प्रयोग करने से यूरिक एसिड की समस्या नहीं होगी।


*5. गुडूच्यादि काढ़ा:-* गुडूच्यादि काढ़ा (ये आपको किसी भी पंसारी या आयुर्वेदिक दवा केंद्र पर मिल जायेगा) दो समय पिए।


*6. पानी:-* दिन में कम से कम 3-5 लीटर पानी का सेवन करें। पानी की पर्याप्‍त मात्रा से शरीर का यूरिक एसिड पेशाब के रास्‍ते से बाहर निकल जाएगा। थोड़ी – थोड़ी देर में पानी को जरूर पीते रहें।


*परहेज। 


1. दही, चावल, अचार, ड्राई फ्रूट्स, दाल, और पालक बंद कर दे।

2. रात को सोते समय दूध या दाल का सेवन अत्यंत हानिकारक हैं।

3. सब से बड़ी बात के खाना खाते समय पानी नहीं पीना, पानी खाने से डेढ़ घंटे पहले या बाद में ही पीना हैं।

4. फ़ास्ट फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड फ़ूड, अंडा, मांस, मछली, शराब, और धूम्रपान बिलकुल बंद कर दे।

5. इन प्रयोग से आपकी यूरिक एसिड की समस्या, हार्ट की कोई भी समस्या, जोड़ो के दर्द, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या में बहुत आराम आएगा।


6. रोग की गंभीरता को देखते हुए ये प्रयोग लम्बा चल सकते हैं। निरंतरता और धैर्यता अपनाये

डा सुरेंद्र सिंह विरहे मनोदैहिक स्वास्थ्य आरोग्य विशेषज्ञ आध्यात्मिक योग थैरेपिस्ट लाइफ कोच डिवाइन लाईफ सॉल्युशंस 

उत्कर्ष मेंटल हैल्थ केयर एंड एंप्लॉयमेंट वेलनेस कंसलटेंसी 

28/6

साऊथ तुकोगंज इंदौर

Wednesday, April 16, 2025

 यात्रा और जीवन के गहरे अर्थ को दर्शाता है। संस्कृत में वाक्य, "यात्राया अर्थः अस्ति, अन्यथा अन्तः क्षणिकः स्यात्," 

 हिंदी अनुवाद, "सफ़र के मायने हैं, अन्यथा अन्त तो क्षणिक है," इस विचार को व्यक्त करता है कि जीवन (या यात्रा) का मूल्य उसके उद्देश्य और अर्थ में निहित है। यदि यात्रा अर्थहीन हो, तो उसका अंत केवल क्षणभंगुर और नश्वर होगा।


 व्याख्या:

यात्रा (सफ़र): यहाँ यात्रा केवल भौतिक यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन की यात्रा, आध्यात्मिक खोज, या किसी लक्ष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक हो सकती है।


अर्थः अस्ति (मायने हैं): जीवन या यात्रा का मूल्य तभी है जब उसका कोई उद्देश्य हो। यह उद्देश्य व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत, सामाजिक, या आध्यात्मिक हो सकता है, जैसे आत्म-साक्षात्कार, सेवा, या ज्ञान प्राप्ति।

अन्यथा अन्तः क्षणिकः स्यात् (अन्यथा अन्त तो क्षणिक है): यदि यात्रा का कोई अर्थ नहीं है, तो उसका अंत केवल एक क्षणिक घटना बनकर रह जाता है, जो शून्य और निरर्थक है। यह मृत्यु या किसी कार्य के समापन को संदर्भित कर सकता है, जो बिना उद्देश्य के महत्वहीन हो जाता है।


दार्शनिक संदर्भ:

यह विचार भारतीय दर्शन, विशेष रूप से वेदांत और बौद्ध दर्शन से प्रेरित प्रतीत होता है, जहाँ जीवन की नश्वरता (अनित्यता) और उद्देश्यपूर्ण जीवन (धर्म, कर्म) पर बल दिया जाता है।

भगवद्गीता में भी कहा गया है कि कर्म का उद्देश्य महत्वपूर्ण है, और निष्काम कर्म (बिना फल की इच्छा के कर्म) जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है।


बौद्ध दर्शन में "मध्यम मार्ग" और "चतुर्विध आर्य सत्य" जीवन को दुख से मुक्ति और अर्थ प्रदान करने का मार्ग दिखाते हैं।


आधुनिक संदर्भ:

आज के समय में यह उद्धरण हमें प्रेरित करता है कि हम अपने जीवन में उद्देश्य खोजें। चाहे वह करियर, रिश्ते, या आत्म-विकास हो, बिना अर्थ के ये सब क्षणिक सुख दे सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक संतुष्टि नहीं। 


उदाहरण के लिए:


एक व्यक्ति जो केवल भौतिक सुखों के पीछे भागता है, वह अंत में खालीपन महसूस कर सकता है।

वहीं, जो लोग समाज सेवा, रचनात्मकता, या आत्मिक खोज में लगे हैं, वे अपने जीवन को अधिक अर्थपूर्ण पाते हैं।

डिवाइन लाईफ सॉल्युशंस :

यह उद्धरण हमें याद दिलाता है कि जीवन की यात्रा का हर कदम उद्देश्य के साथ उठाया जाना चाहिए। अर्थपूर्ण यात्रा ही जीवन को स्थायी मूल्य देती है, अन्यथा अंत केवल एक क्षणिक पड़ाव बनकर रह जाता है।

जीवन समाधान और स्वास्थय देखभाल परामर्श हेतु संपर्क करें डॉक्टर सुरेंद्र सिंह विरहे मनोदैहिक मानसिक स्वास्थ्य आरोग्य विशेषज्ञ आध्यात्मिक योग चिकित्सक लाईफ कोच डिवाइन लाईफ सॉल्युशंस इंदौर मध्य प्रदेश 

098260 42177 

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वेरिकोस वेन्स (Varicose Veins):-नसों की सूजन का साइलेंट खतरा

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