Friday, January 19, 2024

 How to increase your vital energy


To be successful in all aspects of our physical, mental, emotional, material and spiritual life, one thing is essential and that is our vital energy, our energy level. The more we have vital energy, the more we will be successful in life and the less it will be, the more we will fail. Being at a lower level of life energy brings a person to the lowest level i.e. sorrow, pain, fear, sadness, failure, negativity etc.


To keep your energy level high and to recharge it every day and to awaken all your sleeping powers, follow the following things: -


1) One should do physical exercises daily like running, swimming, playing, cycling, walking, doing yoga, exercising, dancing, laughing etc. Because by doing various types of physical exercises, the veins and nerves of our body open, which increases the blood flow in these nerves and increases the vital energy.


How much life energy we have inside us depends on the amount of oxygen in our body and mind because the other name of oxygen is life energy. And to increase the amount of oxygen, practice Pranayama like Kapalbhati, Bhastrika, Agnisar, Anulom-Vilom etc. every morning in an open place. 


For more information


For health consultation, disease diagnosis and problem resolution, contact:

Dr Surendra Singh Virhe

psychosomatic health specialist

Spiritual Yoga Therapist Life Coach


Former Research Scholar


"Philosophy of Mind And Consciousness

Studies Through Yoga "

Indian Council of Philosophical Research New Delhi


*Foundation Member

Madhya Pradesh Mental Health Alliance


Former Deputy Director

Madhya Pradesh Sahitya Academy Culture Council Department of Culture Bhopal Madhya Pradesh


Research Coordinator

Religious Trust and Endowment Department Madhya Pradesh

09826042177

08989832149

Monday, January 15, 2024

बॉलीवुड फिल्मों में पश्चिमी संस्कृति का नकारात्मक प्रभाव नई युवा पीढ़ी की बर्बादी पतन का कारण?

बॉलीवुड फिल्मों में पश्चिमी संस्कृति का नकारात्मक प्रभाव नई युवा पीढ़ी की बर्बादी पतन का कारण? 

युवाओं में बॉलीवुड ओ  टी टी फिल्मों के कारण दिखावटी, भोगवादी जीवन शैली पोर्नोग्राफी व्यसन,  नशाखोरी मादक पदार्थों के सेवन की बुरी लत को  बढ़ती  जा रही है 

पहले की हिंदी फ़िल्में हमे हमारी संस्कृतियों से, परम्पराओं से, संस्कारों से, परिवार से, समाज से, सभी धर्मों को अन्य धर्मों से जोड़ कर रखती थी।

 लेकिन वहीँ आज की बॉलीवुड प्रसारित फिल्मों में इन सब की भूमिका को खत्म करके पश्चिमी संस्कृति को प्रसारित किया जाता है, जहाँ नग्नता और अश्लीलता, वासना, हिंसा, शराब पीना-जुआ खेलना, अपनी संस्कृति को निचा दिखाना और अपने परम्पराओं एवं सभ्यताओं के विरुद्ध जाकर किसी चीज को प्रसारित किया जाता है, जो की भारतीय समाज पर एक गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। 

युवाओं में इन स्वास्थ्य की दुश्मन मादक पदार्थों के सेवन की आदतों, कु प्रव्रतियों को जड़ से खत्म करना चुनौती बन गया है।

 जबकि युवाओं को अपने जीवन में योग, ध्यान ,प्राकृतिक ऑर्गेनिक आहार , आध्यात्मिक संतुलित  जीवन शैली अपनाने की ओर प्रेरित करना होगा ।

युवा सद आचरण और संयम व्रत का अनुपालन करें। झूठ, फरेब, धोखा लालच,घमंड, इर्षा, बैर आदि को अपने व्यवहार में न आने दें क्योंकि इन सब अवगुणों से दूराचार,पाखंड कुकर्मों से आत्म ग्लानि आत्म क्लेश बढ़ता है 

जिससे मानसिक तनाव,अवसाद ,निराशा, नकरात्मकता बढ़ती है और फिर युवा मानसिक रूप से बीमार हो जाते हैं।

इन सब से  युवाओं को बचाना होगा इसके लिए सात्विक विचार भाव आचरण में सकारात्मकता अपनाना मानवीय मूल्यों और संवेदनशीलता आध्यात्मिकता सनातन संस्कृति के जीवन मूल्यों को दैनिक जीवन में सर्वोच्च महत्व देकर अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा नई पीढ़ी व युवाओं को देनी होगी । अन्यथा हमारा व आने वाली नई युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय और आत्मघाती हो जाएगा।


नैतिक मूल्यों आदर्शो को अपनाने के लिए नई पीढ़ी को सनातन धर्म संस्कृति के अनुरूप शिक्षा संस्कार देने होंगे। युवाओं को उद्यमिता के साथ साथ आधुनिकता के इस दौर में आध्यात्मिकता से भी जोड़ना होगा।

साधन और साध्य की सुचिता, कथनी और करनी की प्रामाणिकता, पारस्परिक प्रेम, सदभाव,सहयोग, सहानुभूति द्वारा सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा समझ जगाना होगी।


व्यक्तिगत जीवन सादगीपूर्ण और सार्वजनिक जीवन कर्त्तव्य पालन, सुनागरिकता दायित्व निर्वहन के साथ  जीना युवाओं को नई पीढ़ी को सीखना होगा।

मनोदैहिक आरोग्य और आध्यात्मिक स्वास्थ्ययुक्त जीवन हेतु संपर्क करें

डा सुरेन्द्र सिंह विरहे 

आध्यात्मिक योग थैरेपिस्ट लाइफ कोच

मनोदैहिक आरोग्य विशेषज्ञ 

9826045177


 

Sunday, December 24, 2023

Corona Covid infection may once again spread in the form of new variants... there is a need to be cautious

Corona Covid infection may once again spread in the form of new variants... there is a need to be cautious.*


 The top priority in your life should be to get good health for yourself and your family.


 In today's deteriorating environment and polluted environment, it is difficult to achieve health and in the environment of mental illness and severe serious illness, health security system of people is very important. Any kind of carelessness towards health can be fatal. Inattention to health hygiene is tantamount to inviting infection. Take a pledge to lead a healthy life.


 Improve your lifestyle, eating habits, daily routine. Meet adequate sleep requirements. Addiction, daily drug abuse, give up the bad habit of drug abuse as soon as possible.


 Root out these health-threatening drug habits and vices. Adopt yoga, meditation and natural organic diet in your life.


 Follow the fast of good conduct and restraint.


Do not let lies, deceit, deceit, greed, pride, jealousy, hatred etc. come into your behavior because all these vices lead to misconduct, hypocrisy, misdeeds and self-guilt, which increases mental stress, depression, despair, negativity and then we Become mentally ill.


 To avoid all this, we will have to adopt virtuous thoughts and conduct. We have to live a disciplined life by giving utmost importance to the life values of human values and sensitivity, spirituality and Sanatan culture in daily life. Otherwise our future and that of the coming young generation will become bleak and suicidal.


To adopt moral values and ideals, the new generation will have to be given education and culture as per Sanatan Dharma culture. Along with entrepreneurship, the youth will also have to be connected with spirituality in this era of modernity.


The inspiration for living a harmonious life will have to be awakened through rationality of means and ends, authenticity of words and actions, mutual love, goodwill, cooperation and sympathy.



Contact us for psycho-physical health and a spiritually healthy life


Dr. Surendra Singh Virhe

Psychosomatic Spiritual Health Specialist & Yoga Therapist Life Coach

 9826042177

utkarshfrom1998@gmail.com


 Contact us for psycho-physical health and a spiritually healthy life


 Dr Surendra Singh Virhe

 Psychosomatic Spiritual Health Specialist & Yoga Therapist Life Coach

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Sunday, July 2, 2023

जीवन में गुरु का महत्व एवं गुरु महिमा

 जीवन में गुरु का महत्व एवं गुरु महिमा 

1जन्मदाता : व्यक्ति को सर्व प्रथम गुरु माता- पिता के प्रति सदा जीवन भर आभारी रहना चाहिए। 

माता पिता के कारण ही आपका अस्तित्व है।

2. शिक्षक: अपने शिक्षक जिससे आपने शिक्षा ली हे , उनके प्रति सदा आभारी रहना चाहिए। 

गुरु ज्ञान आशीष के पुण्य प्रताप से ही व्यक्ति अपने जीवन में सफलता कीर्ति यश वैभव समृद्धि प्राप्त करता है।

3 प्रकृति कृपा : पंच महाभूत से समस्त विश्व सृष्टि का निर्माण हुआ है  प्रकृति जो हमे पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश 5 तत्वों से संचालित कर रही हैं। उसके प्रति सदा आभारी रहना चाहिए। 

4. प्रेरणा स्त्रोत : जहां से भी कुछ अच्छा सीखने को मिलता है जो हमारे ज्ञान को पुष्ट करता है, चाहे फिर वो कोई व्यक्ति हो या कोई पदार्थ या कोई अच्छा ग्रंथ, उस  प्रेरणा स्त्रोत का हृदय से आभार मानना चाहिए।।


5. कृतज्ञता भाव: इस दिन केवल गुरु की ही नहीं अपितु जहां से भी आपने कुछ अच्छा सीखा है, जहां से भी अच्छे मार्गदर्शन व श्रेष्ठ संस्कार मिलते हैं वह सभी गुरु की श्रेणी में आते हैं। कृतज्ञता भाव से उन सब का भी धन्यवाद करना चाहिए।


6. स्वयंभू गुरु पाखण्डी धूर्त तथाकथित गुरु से सचेत रहें: सबसे महत्व पुर्ण अपने आप को गुरु घंटालो से बचा के रखना है। क्योंकि गुरु का कोई स्वरूप नही होता है। जो गुरू आपको अपनी ज्योति स्वयं बनाना सीखाता हो, वही सच्चा गुरु हे। 


जो स्वयंभू गुरु आपसे खुद की पूजा करवाता हो वह गुरू कदापि नही हो सकता। 

7. धर्म पत्नी: अर्धांगिनी साक्षात शक्ति स्वरूपा गुरु के रूप में व्यक्ति के जीवन में पत्नी जीवन संगिनी का महत्व सबसे विशेष एवम उल्लेखनीय है । धर्म पत्नी हर पल हर हालात हर प्रसंग पर अच्छे बुरे समय में आपकी शुभचिंतक होती हैं

आपको प्रेरित कर चुनौती स्वीकारने की सीख देती है।

8. मासूम बच्चे भी छोटे उस्ताद गुरु होते हैं: जीवन के कई अवसर पर बच्चे भी बड़ी से बड़ी सीख दे देते हैं  बच्चे मन के सच्चे होते हैं निश्चल भाव निर्भार उत्साही रहना बच्चे ही सीखा सकते हैं।

*अतः आशा करते हैं कि यह गुरु पूर्णिमा पर्व आपके लिए अत्यन्त शुभकारी रहे, यह पर्व आपके जीवन में स्वयं के ज्ञान का प्रकाश लाये 💐*

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।


आप सभी को “गुरु पूर्णिमा” के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 


जीवन में अज्ञानता का अंधकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश देने वाले सभी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष शुभचिंतक गुरुजनों को आत्मीय प्रणाम व अभिवादन 

गुरु वंदन सहित सादर प्रणाम।💐🚩💐

डा सुरेंद्र सिंह विरहे

उप निदेशक 

साहित्य अकादमी संस्कृति परिषद् संस्कृति विभाग

मध्य प्रदेश शासन भोपाल

समन्वयक 

आध्यात्मिक नैतिक मूल्य शिक्षा शोध

धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग मध्य प्रदेश

9826042177



Sunday, May 21, 2023

वरिष्ठ नागरिक सेवा संरक्षण

वरिष्ठ नागरिक सेवा संरक्षण एवम नई पीढ़ी हेतु अनुभव शिक्षा मिशन 

वर्तमान सूचना प्रौद्योगिकी तकनीकी संपन्नता के इस दौर में भौतिकवाद की उपभोक्तावादी भोगवादी मानसिकता बढ़ती ही चली जा रही है । परिणाम स्वरूप समाज में आपाधापी, लोलूप स्वार्थी संकीर्णता फैल गई है । सामाजिक तानाबाना बिखर गया है परिवार व्यवस्था  छिन्न भिन्न हो गई है आपसी प्रेम और विश्वास कम होता जा रहा है। 

परस्पर रिश्तों में तनाव विवाद और टूटन अलगाव बढ़ता ही चला रहा है। ऐसे में परिवार के वरिष्ठ बड़े बुजुर्ग सदस्यों की जिंदगी संकट ग्रस्त हो गई है उन्हें नियमित समुचित स्वास्थ्य सुविधा और औषधि, पौष्टिक आहार भी नही मिल पा रहा है इस तरह वरिष्ठ नागरिक समाज परिवारों में विषम प्रतिकूल दशा उपेक्षित व्यवहार व दयनीय स्थिति में अपना जीवन यापन करने पर मजबूर हैं। 

जबकि नई पीढ़ी को भावी जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शिक्षा दीक्षा नोनिहालों को संस्कारवान बनाने में परिवार को सुरक्षित संरक्षित रखने में युवाओं को अपने जीवन के अनुभवों से सिखाने प्रेरणा देने की महत्त्वपूर्ण भूमिका सदैव से घर परिवार और समाज में बड़े बुजुर्ग वरिष्ठ सदस्यों की रही है। 

निसंदेह वरिष्ठ नागरिकों की समाज में काफी महत्वपूर्ण उपयोगिता हैं। वरिष्ठ नागरिक समाज की अमूल्य अमानत हैं। हमेशा से ही समाज के विकास में भी वरिष्ठ नागरिकों का काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 

 वरिष्ठ नागरिकों को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों का व्यापक स्तर पर अनुभव होता है। इसलिए युवा वर्ग को हमेशा इनके करीब रहकर इनसे ज्ञान और संस्कार प्राप्त करनी चाहिए।

समाज परिवारों में वरिष्ठ नागरिक बड़े बुजुर्ग सदस्यों की तनाव ग्रस्त दशा उपेक्षित व्यवहार की बढ़ती घटनाएं गंभीर व चिंताजनक विषय है।

वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीने की व्यवस्था समुचित स्वास्थ्य देखरेख औषधि, आहार पोषण आवास संरक्षण मिले । इस हेतु व्यापक स्तर पर सुधारात्मक गतिविधियां संचालित की जाने की आवश्यकता है। 

वरिष्ठ नागरिक सेवा संरक्षण एवम नई पीढ़ी हेतु अनुभव शिक्षा मिशन  उसी दिशा में अपनी सार्थक भूमिका निभाने के वरिष्ठ नागरिक सेवा संकल्प पालन हेतु कार्यरत हो युवा पीढ़ी वरिष्ठ नागरिक परस्पर पूरक सेवा सम्पर्क संवाद विगत कई वर्षों से अपनी सेवा प्रदान कर रहा है।

वरिष्ठ नागरिक  स्वास्थ्य पौष्टिक आहार औषधि सेवा आध्यात्मिक योग ध्यान कार्यक्रम आयोजन हेतु संपर्क करें।

आइए आप भी इस भारतीय संस्कृति के पुनीत "वानप्रस्थ आश्रम" वरिष्ठ बुजुर्ग सेवा  के कर्तव्य पालन  से जुड़े एवम अपने वरिष्ठ नागरिक सम्मान सेवा संरक्षण मिशन को मजबूती प्रदान करें।

डा सुरेंद्र सिंह विरहे

Divine Life Solutions

उत्कर्ष.. संस्थान

नोदैहिक आरोग्य विशेषज्ञ वम आध्यात्मिक मानसिक स्वास्थ्य योग चिकित्सक 

उप निदेशक

मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी संस्कृति परिषद्

शोध समन्वयक

आध्यात्मिक नैतिक मूल्य शिक्षा शोध

धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग मध्य प्रदेश शासन भोपाल मध्यप्रदेश

9826042177

8989832149


Saturday, April 1, 2023

*कोरोना कोविड संक्रमण एक बार फिर से फैल सकता है ... सावधान सतर्क होने की आवश्यकता है।*

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*कोरोना कोविड संक्रमण एक बार फिर से फैल सकता है ... सावधान सतर्क होने की आवश्यकता है।*


अपने जीवन में सर्वोच्च प्राथमिकता अपने एवं परिवार के लिए स्वास्थय आरोग्य पाना होना चाहिए।


आज के बिगड़ते पर्यावरण और मानसिक रोग ग्रस्तता विकट गंभीर रूग्णता के वातावरण में लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। किसी भी तरह की स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही घातक हो सकती है। स्वास्थ्य स्वच्छता के प्रति असावधानी संक्रमण को न्यौता देने के समान है। स्वस्थ जीवन का संकल्प लें।


 अपनी जीवन शैली, खानपान, दिन चर्या सुधारें। पर्याप्त निंद्रा आवश्यकता को पूरा करें। व्यसन, प्रतिदिन नशाखोरी मादक पदार्थों के सेवन की बुरी लत को शीघ्र अतिशीघ्र त्याग दें। 


इन स्वास्थ्य की दुश्मन मादक पदार्थों के सेवन की आदतों, कुप्रव्रतियों को जड़ से खत्म करें।अपने जीवन में योग, ध्यान ,प्राकृतिक ऑर्गेनिक आहार अपनाए। 


सद आचरण और संयम व्रत का अनुपालन करें। झूठ, फरेब, धोखा लालच,घमंड, इर्षा, बैर आदि को अपने व्यवहार में न आने दें क्योंकि इन सब अवगुणों से दूराचार,पाखंड कुकर्मों से आत्म ग्लानि आत्म क्लेश बढ़ता है जिससे मानसिक तनाव, अवसाद ,निराशा, नकरात्मकता बढ़ती है और फिर हम मानसिक रूप से बीमार हो जाते हैं। 


इन सब से बचने के लिए सात्विक विचार भाव आचरण हमें अपनाना होगा। मानवीय मूल्यों और संवेदनशीलता को दैनिक जीवन में सर्वोच्च महत्व देकर अनुशासित जीवन जीना होगा। अन्यथा हमारा व आने वाली नई युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय और आत्मघाती हो जाएगा।


 नैतिक मूल्यों आदर्शो को अपनाने के लिए नई पीढ़ी को सनातन धर्म संस्कृति के अनुरूप शिक्षा संस्कार देने होंगे। युवाओं को उद्यमिता के साथ साथ आध्यात्मिकता से भी जोड़ना होगा।


साधन और साध्य की सुचिता, कथनी और करनी की प्रामाणिकता, पारस्परिक प्रेम, सदभाव,सहयोग, सहानुभूति द्वारा सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा समझ जगाना होगी।


व्यक्तिगत जीवन सादगीपूर्ण और सार्वजनिक जीवन कर्त्तव्य पालन, सुनागरिकता दायित्व निर्वहन के साथ जीना होगा।


मनोदैहिक आरोग्य और आध्यात्मिक स्वास्थ्ययुक्त जीवन हेतु संपर्क करें

डा सुरेंद्र सिंह विरहे

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जीवन आज है अभी है इसी पल में आनंद असली मौज है

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जीवन आज है अभी है इसी पल में आनंद असली मौज है

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 जीवन आज है अभी है इसी पल में आनंद असली मौज है। जो बीत गया सो बीत गया,अच्छा बुरा वक्त, अच्छे बुरे अनुभव, अच्छे बुरे लोगों से संबंध कभी न कभी छूट ही जाता है। इसलिए बीते कल की बातें को भूलकर अच्छी बुरी स्मृतियों, अच्छी बुरी घटनाओं, अच्छे बुरे बर्ताव दूसरों द्वारा किए गए मान अपमान आदि को नजरंदाज करके एक नई शुरुआत फिर से करें।

 आज में वर्तमान में जिंदादिली से पूरे उत्साह उमंग के साथ ज़िंदगी को हर पल आनंद खुशी और मुस्कुराहट के साथ जीना सीखें।खुद की परवाह,खुद की फिक्र सबसे पहले करना सीखें। दूसरा कभी भी आपका हमेशा साथ नहीं देने वाला है।हर एक रिश्ता प्रिय या अप्रिय एक न एक दिन छूट ही जाता है।

स्वयं को गहरे से जाने,स्वयं से आत्म संवाद करने की कला सीखें। खुदी को बुलंद करें। अपने मन मस्तिष्क में शान्ति स्थापित करें। बैचेन होने व्याकुल, व्यग्र होने से बचें। विचारों में सकारात्मकता लाएं।नकारात्मक बातों को छोड़कर,नकारात्मक सोच वालों से दूरी बना लें। स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति सदैव सजग सचेत रहें। सुबह की सैर करने नियमित रूप जाएं, उगते सूरज को निहारें। पंछी चिड़िया के कलरव को सुनें। एकांत में, मौन में रहना सीखें। 

अपने आपको ध्यान की अनुभूतियों से जोड़कर सृजनात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करें। कला ,संगीत , नृत्य आदि से स्वयं को जोड़ें। स्वाध्याय पठन पाठन लेखन आदि में स्वयं को व्यस्त रखें। अपने जीवन को किसी महान लक्ष्य एवम आध्यात्मिक ध्येय अनुगामी बनाने में सदैव तत्पर व सक्रिय रहें।

अपनी स्वाभाविक प्रवृत्तियों को जानें।अपनी मूल रुचि अभिरुचि में तल्लीन रहना सीखें।

मनोदैहिक आरोग्य एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य लाभ लेने अथवा अधिक परामर्श लेनें हेतु संपर्क करें :

डा.सुरेंद्र सिंह विरहे

मानसिक मनोदैहिक आध्यात्मिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ 

लाईफ कोच

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Saturday, March 25, 2023

सनातन धर्म हिंदू युगांतर गौरवशाली परंपरा की अद्वितीय महान पहचान है।

 सनातन धर्म शाश्वत सत्य और गौरवशाली अतीत का प्रतीक है।

सनातन धर्म हिंदू भारतीय संस्कृति दर्शन इतिहास की युग युगांतर गौरवशाली परंपरा की अद्वितीय महान पहचान है।

"मानव जाति का सनातन धर्म जो भारतवर्ष की युग-युगांतर जीवन शैली ही हुआ करती थी, उसका नामकरण सिंधु नदी पारकर आए आक्रमणकारियों और आगंतुकों नें सिंधु कर दिया और समय के साथ सिंधु - हिंदु (Indus - India) बन गया।


 इस प्रकार भारत को अरब प्रदेश में "हिंदुस्तान" के नाम से जाना गया और हमने सहर्ष ही इस नाम से सम्बोधित अपनी पहचान को अपना लिया। इस तरह सनातन धर्म (शाब्दिक अर्थ "शाश्वत धर्म") का नाम हिंदु धर्म पड़ गया जो सिंधु नदी से व्युत्पन्न है।


यह धर्म एक व्यक्ति,संत, पैगम्बर, या नबी द्वारा नही स्थापित किया गया, क्योंकि ज्ञान तो अनादि है, तथा "भगवान – सृष्टिनिर्माता - मूलसत्" को आत्मसात करने का सनातन "विज्ञान" वेदों में वर्णित है। वेदों के इस विज्ञान को कलियुग के हेतु गीता (कृष्ण-अर्जुन के बीच संवाद का प्रतिनिधित्व करने वाले 700 छंद की एक रचना) में पुनः सारगर्भित किया गया। 

 सनातन धर्म के अनुसार, देवी देवता भी सूक्ष्म और कारण देही प्राणी हैं, जो स्वकर्म द्वारा दैवीय स्थिति को प्राप्त कर ,स्थूल देह से मुक्त होकर परा प्रकृति में जीवन यापन करते हैं, परंतु वह भी अपूर्ण हैं और कैवल्यम् के लिये प्रयासरत् हैं।


सनातन धर्म में केवल एक ही परमेश्वर (परम निरपेक्ष चेतना) का गुणगान है। वह सच्चिदानंद ही परम स्रोत / ऊर्जा / ब्रह्मांड निर्माता है। ब्रह्मांडीय चेतना के तीन पहलू हैं - सर्वप्रथम सृजनात्मकता ब्रह्मा के रूप में दर्शाया गया है, तत्पश्चात् विलयात्मकता शिव के रूप में चित्रित किया गया और पोषणात्मकता विष्णु के रूप में चित्रित है। वह परम चैतन्यता पारब्रह्म या जगदीश (अस्तित्व के तीनों आयामों के ईश) है।

 

इन ज्ञानपूरित अवधारणाओं को साधारण मनुष्य के चित् पर अंकित करने हेतु, चित्रों और प्रतीकों का उपयोग किया गया। उदाहरण के लिए कुछ देवी देवताओं को सहस्त्रकमल पर विराजमान किया जाता है, इसका मतलब है कि उन जीवात्माओं ने जितेन्द्रीय चैतन्यस्थिति (सभी 10 इंद्रियाँ और उनमें से प्रत्येक के 100 उप-कार्यों पर विजय) प्राप्त कर ली। कुछ सूक्ष्म दिव्य प्राणियों को हम पितृरूप में मार्गदर्शक मानते हैं, इससे ऊँचे कुलदेवी-देवता, उसके उपरांत अन्य देवी और देव तथा उच्चतम हैं महादेव, यद्यपि महादेव कोई देवता नही हैं अपितु, स्वयं सच्चिदानंद हैं; परंतु हम शब्दजाल में फँस जाते हैं।

यह मानव शरीर प्रभुता से एकत्व हेतु एक उत्तम साधन से ज्यादा कुछ नहीं, समस्त विज्ञान की शाखाओं की परिणति "आध्यात्मिक विज्ञान" है। हिंदू धर्म की अनेकों कथाएँ देवताओं का उल्लेख करती हैं और देव असंख्य हैं; क्योंकि आज की मानवरूपी जीवात्मा - कल की भावी देवात्मा है और वह “कल” भविष्य में कितना दूर है, यह हमारे सत्कर्म निर्धारित करते हैं। जब मानव को प्रकृति के रहस्य, आध्यात्मिक विज्ञान के अभ्यास से ज्ञात होते हैं तो उसके कर्म, हम स्वयं की अनभिज्ञता के कारण, अलौकिक शक्तियों द्वारा सम्पन्न समझते हैं।


सभी देवी देवताओं को त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु और शिव / महेश) से निम्न परिलक्षित करते हैं। ये देवी देवता भी अपनी सूक्ष्म देह मात्र में कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं और परमेश्वर के साथ एक होने के लिए प्रयासरत हैं; तथा एकत्व प्रगमन हेतु विशिष्ट परिस्थितियों में कभी मानव शरीर धारण करने की भी जरूरत होती है। इस प्रकार, देवी देवता भी सृष्टिनियम की सीमाओं से बंधे हुए हैं, लेकिन सच्चिदानंद सृष्टि के जनक हैं और उससे परे हैं।


इस त्रिमूर्ति को कई अवधारणाओं को समझाने हेतु युग-युगांतर में प्रयुक्त किया गया है जिससे अल्पज्ञानियों को भ्रांति और दुविधा होती है, जैसे:


१. परम निरपेक्ष चेतना है:- सत् (विष्णु) - चित् (शिव) - आनंद(ब्रह्मा)  


२. प्रभुता का आरोहण:- ओम् (ब्रह्मा) - तत् (शिव) - सत् (विष्णु) 


३. त्रिमूर्ति ईश्वर:- परमेश्वर (विष्णु) - महेश्वर (शिव) - ब्रह्मेश्वर (ब्रह्मा) 


४. ईसा मसीह द्वारा प्रस्तुतीकरण:- गाॅड द फादर (विष्णु) - सन् आॅफ गाॅड (शिव) - होली गोस्ट (ब्रह्मा)

५. त्रिगुणी प्रकृति (दुर्गा):- सत् (विष्णु) - रजस (ब्रह्मा) - तमस (शिव) 


६. सृष्टिचक्र:- सृजन (ब्रह्मा) - पोषण (विष्णु) - विलय (शिव) 

७. परम निरपेक्ष चेतना की अभिव्यक्ति:- कर्ता (ब्रह्मा) - धर्ता (विष्णु) - हर्ता (शिव)


देवी देवता प्राणी हैं, जो सूक्ष्म और कारण संसार में आम तौर पर कार्य कर रहे हैं परंतु हम इस लेख में उस दिशा में नही जायेंगे। जितनी उच्चतर जीवात्मा, उतना ही उच्च देवता का विकास। दैवीय स्थितिनुसार एवं कर्मानुसार, देव भी अपने पदों को कुछ समय के बाद खो देते हैं, कुछ भी कैवल्यम् के पद पर आसीन होने से पूर्व प्रत्याभूतित नही है। हाँलाकि, उच्चतर आवृत्तियों से स्पंदनशील सूक्ष्म क्षेत्रों में काल का माप हमारे समय के माप से बहुत भिन्न है। काल की इकाई, परिवर्तन की माप मात्र है और सूक्ष्म जगत् अधिक स्थिर है, इस प्रकार, सूक्ष्म जगत के समय की इकाई - सांसारिक या, अस्तित्व के दृश्य जगत् की तुलना में काफी लंबी है।

सभी अनन्त वैयक्तिक आत्माओं का अंतिम गंतव्य अपने महासागर परमात्मा जनक के साथ एकत्व ही है और उसके बाद ही स्वयं की वास्तविकता का एहसास होता है; परम सच्चाई की अनुभूति। वैयक्तिक आत्माओं (पुरुष) और सृष्टि (प्रकृति) के मिलन से ही गतिविधि चक्र का चलन है और जब विलय (शिव का तांडव) पश्चात्, रचनात्मक चक्र एक निष्क्रिय अवस्था में आता है, तत्पश्चात् पुनः सृष्टि चक्र शुरू होता है और इस प्रकार चैतन्य गतिविधि निरंतर जारी है।


मौलिक तौर पर , अस्तित्व के सात आयाम, परम सत्य के परिचायक हैं। जितना उच्चतर जीवात्मा का विकास, उतना ही उच्च उसके अस्तित्व का आयाम, उतनी उच्च स्वतंत्रता एवं उच्च परिचालन शक्तियों और उच्च स्थिरता के लिए वह अग्रणी रहेगा।


शिरडी साईं बाबा की अलौकिक शक्तियां देखकर हमारे द्वारा उन्हे भगवान करार दिया गया है और इस तरह से सनातन धर्मानुसार देवी-देवता वास्तव में अनंत हैं क्योंकि प्रत्येक मानव, भगवान की एक दर्पण छवि (ईश्वर साक्षात्कार की क्षमता) है। मानवरूप में आने के उपरांत, जीवात्मा का विकास उसकी स्वतंत्र इच्छाशक्ति पर निर्भर है। उत्तरार्द्ध पथ का अनुगमन, अविद्या के कारण नही चुना जाता है।


परमात्मा बलपूर्वक अथवा इच्छा शक्ति के साथ हस्तक्षेप से नहीं, अपितु, व्यक्तिगत आत्माओं का उसके प्रति, प्रेम और भक्ति (तीव्र प्रेमादर ही भक्ति है) के द्वारा अपनाता है।


इस प्रकार देवता भी निस्संदेह अपने भक्तों का सीमित मार्गदर्शन सृष्टि नियम के अधीन करने के लिए बाध्य हैं। जैसे एक कमांडर अपने दल के लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं, हालांकि, सेना के नियमों का पालन करना पड़ता है।


शिरडी साईं बाबा, गौतम बुद्ध, राम, कृष्ण, मोहम्मद, यीशु, गुरु नानक और बाकी सबने परम देवत्व तक पहुँचने और पारब्रह्म के साथ एकत्व हेतु, योग का अभ्यास किया;

 परंतु कृष्ण जन्म के पहले दिन से ही परम चेतना को धारणकर अलौकिक शक्तियों के स्वामी थे, अतः उन्हें पूर्णावतार कहते हैं; वह सच्चिदानंद की एक मानव शरीर के रूप में अभिव्यक्ति थे।

सनातन धर्म सच्चिदानंद स्वरूप का दर्शन है, देवी-देवता धर्म कदापि नही। इस भारतभूमि (“भा” अर्थार्त ज्ञान प्रकाश - “रत” अर्थार्त जुड़ा स्थल) को कोटि-कोटि नमन। 


हर मानव अपनी अनूठी शीर्ष यात्रा पर चल रहा है - योगेश्वर होने के लिए; अर्थात पारब्रह्म से योग हेतु।


जय महान  भारतवर्ष...

Wednesday, February 8, 2023

Personality Development Trainer/Faculty Job

 

Personality Development Trainer/Faculty

व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक/शिक्षक

Divine Life Solutions looking for an innovative PDP Trainer to design training programs for students who need more corporate training. The trainer must be good observant and have excellent analytical skills. A good trainer is able to use alternative teaching methods to cater to various individuals.

Trainer Responsibilities

●Making & delivering high-impact Presentations

●Overcoming fear or hesitation in speaking

●Developing Leadership and self-confidence in public speaking

●Comprehensive Soft Skills: Physical, Mental, Emotional and Spiritual Aspects of Personality Development

●Communication Skills expertise: Saying the right thing at the right time

●Mastering non-verbal communication: Powerful body language

●Effective voice projection, eye contact and gestures

●Success in Interviews and interactions

●The Power of Positive thinking and Attitude

●Achieving your goals

●Research new Teaching Methods.

●Attend Education Conferences.

Trainer Requirements:

● A Degree in Education or Training.

● Prior Experience as a Trainer or a Similar Position.

● Excellent Interpersonal and Communication Skills.

● Ability to Identify Gaps in Skills.

● Knowledge of Various Teaching Methods and Approaches.

● Excellent Organizational Skills

Must have Experience of Providing English Training in a Reputed Institute.

Salary will be Discussed in an Interview.

Job Type: Full-time

Salary: ₹20,000.00 - ₹25,000.00 Per Month

Benefits:

  • Food provided

Schedule:

  • Morning shift

Supplemental pay types:

  • Performance bonus

Ability to commute/relocate:

  • Bhopal,Madhya Pradesh-  Reliably commute or planning to relocate before starting work (Required)

Experience:

  • Total Work: 1 Year

Contact: Divine Life Solutions
utkarshfrom1998@gmail.com
 9826042177
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Thursday, January 26, 2023

वर्तमान में प्रौद्योगिकी एक आशीर्वाद है या अभिशाप ?

वर्तमान में प्रौद्योगिकी एक आशीर्वाद है या अभिशाप ? 

प्रौद्योगिकी यदि सुखद सुविधाजनक सहयोगी उपयोगितापूर्ण हो तो आशिर्वाद है लेकिन

आश्रित बना कर हमें दुखद ,अति, भोगवादिता, शोषक और अनियंत्रित हो तो अभिशाप बन सकती है।


वर्तमान आर्थिक साम्राज्यवादी वैश्विक परिदृश्य में भौतिक सुख सुविधा पाने की होड़ सी मची हुई है प्राकृतिक संसाधनों के लगातार दोहन से प्रकृति अस्तित्व पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया है। प्राकृतिक संसाधनों को हड़पने कब्जा करने के लिए अनेकों देशों में परस्पर युद्ध जारी है। परिणामस्वरूप प्रौद्योगिकी विध्वंशक विनाशकारी साबित हो रही है।

दूसरी ओर सूचना विज्ञान प्रौद्योगिकी संचार माध्यम तकनीकी संपन्नता के चलते व्यक्ति का जीवन उपभोक्तावादी संस्कृति बाजारवाद भोगवाद के वशीभूत होकर अनुत्पादक अकर्मण्य श्रमविहीन हो गया है।

लोगों में आलस्य प्रमाद तनाव बढ़ता जा रहा है जिसके कारण लगातार मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा है।

युवा बच्चें महिलाएं सभी इस सुचना प्रोद्योगिकी इंटरनेट संजाल, मोबाइल ऐप मकड़जाल तकनीकी के चलते अवसाद ग्रस्त तनाव ग्रस्त होते जा रहे हैं मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। इस प्रतिकूल सूचना संचार प्रौद्योगिकी के दुष्परिणाम स्वरूप स्वास्थ्य संबंधित घातक परिस्थितियां अभिशाप साबित हो रही है।

जबकि सूचना संचार प्रौद्योगिकी के विवेकशील उपयोग से ज्ञान संवर्धन तथा आध्यात्मिक उत्कर्ष की असीम संभावनाएं आज सहज रूप से उपलब्ध है।

सूचना प्रौद्योगिकी के ज्ञान विज्ञान को मनुष्य अपने जीवन में सर्वांगीण सकारात्मक प्रगति में उपयोग करके अपने लिए वरदान बना सकता है।

किंतु दुर्भाग्यवश प्रौद्योगिकी उपयोगिता के विषय में आज व्यक्ति केवल दोहन शोषण की जुगाड में लगा हुआ है। मनोरंजन,संकीर्ण मानसिकता, भोगवाद और विलासिता के दिखावे में उलझकर रह गया है।

यदि समय रहते समाज में व्याप्त सूचना प्रौद्योगिकी संचार प्रोद्योगिकी दुष्परिणाम के प्रति जागरुकता पैदा नही की गई तो लोगों में मानसिक रोग तेजी से फैलने लग जाएंगे इसके घातक दुष्परिणम बड़ते ही जाएंगे लोगों में संवेदनशील व्यवहार  विवेकशील आचरण समाप्त होता चला जाएगा।


आज हर व्यक्ति को सूचना प्रौद्योगिकी उपयोगिता के विषय में गंभीर रूप से इसके दुष्परिणाम के प्रति सजग  हो सम्यक उपयोग की समझ को अपनाना होगा। मोबाइल इंटरनेट की व्यसन रूपी लत को नियंत्रित करना होगा।अन्यथा स्व कुंठा अवसाद तनाव एवम परस्पर रिश्तों संबंधों में परिवार में टूटन अलगाव बिखराव बढ़ता ही चला जाएगा।

सूचना प्रौद्योगिकी उपयोगिता की समुचित समझ, पर्यावरण संरक्षण, मानवीय मूल्यों के रक्षण, वैश्विक समृद्धि की आध्यात्मिक शिक्षा देकर संयम योग संस्कृति समरसता सुनिश्चित करके ही मनुष्य के जीवन को वरदान बनाया जा सकता है।

🔸संपर्क🔸

डा सुरेंद्र सिंह विरहे

उप निदेशक

मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी संस्कृति परिषद् संस्कृति विभाग

शोध समन्वयक

(आध्यात्मिक नैतिक मूल्य शिक्षा शोध)

धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग मध्य प्रदेश शासन

* मनोदैहिक आरोग्य आध्यात्मिक स्वास्थ्य विषेशज्ञ एवं लाईफ कोच, स्प्रिचुअल योगा थेरेपिस्ट*


स्थापना सदस्य

मध्य प्रदेश मैंटल हैल्थ एलाइंस चोइथराम हॉस्पिटल नर्सिंग कॉलेज इंदौर


निदेशक

दिव्य जीवन समाधान उत्कर्ष

Divine Life Solutions Utkarsh


पूर्व अध्येता (जे आर एफ)

भारतीय दार्शनिक अनुसन्धान परिषद् दिल्ली

"Philosophy of Mind And Consciousness Studies"

Ex. Research Scholar

At: Indian Council of Philosophical Research ICPR Delhi



utkarshfrom1998@gmail.com


9826042177,

8989832149


मनोयोग माइंड पावर

 अक्सर लोग मुझे पूछते हैं कि - "मैं जानता हूँ कि गुस्सा करना गलत है… फिर भी मुझसे हो जाता है। मैं जानता हूँ कि यह रिश्ता मुझे तोड़ रहा ...