Saturday, February 21, 2026

मनोयोग उत्कर्ष थेरेपी द्वारा सकारात्मक सोच मजबूत करें और जीवन में शांति आ आनंद संतुलन लाएँ।

मनोयोग उत्कर्ष थेरेपी द्वारा सकारात्मक सोच मजबूत  करें और जीवन में शांति आ आनंद संतुलन लाएँ।


मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। आधुनिक मनोविज्ञान, न्यूरोसाइंस और योग विज्ञान — तीनों इस बात की पुष्टि करते हैं कि सही आदतें मस्तिष्क को मजबूत और मन को स्थिर बना सकती हैं।


मनोयोग अर्थात सकारात्मक सोच (Mindset) को मजबूत बनाने के वैज्ञानिक तरीके

1️⃣ सकारात्मक आत्म-संवाद (Positive Self-Talk)

मनोविज्ञान के शोध बताते हैं कि सकारात्मक आत्म-संवाद तनाव हार्मोन (कॉर्टिसोल) को कम कर सकता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।

 रोज स्वयं से कहें: “मैं सक्षम हूँ, मैं स्वस्थ हूँ।”


2️⃣ अनावश्यक चिंता छोड़ना

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) का सिद्धांत है —

जिस पर आपका नियंत्रण नहीं, उसे स्वीकार करना मानसिक शांति का आधार है।


3️⃣शिवम् योग दिव्य उत्कर्ष विद्या ध्यान (Meditation) – 10–15 मिनट

न्यूरोसाइंस रिसर्च के अनुसार नियमित ध्यान:

अमिगडाला (तनाव केंद्र) की सक्रियता कम करता है

प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (निर्णय क्षमता) को मजबूत करता है

👉 रोज 10–15 मिनट श्वास पर ध्यान केंद्रित करें।


4️⃣ कृतज्ञता अभ्यास (Gratitude Practice)

शोध बताते हैं कि रोज 3 चीजें लिखना जिनके लिए आप आभारी हैं, अवसाद के लक्षण कम कर सकता है।


5️⃣ अच्छा संग (Healthy Environment)

लगातार नकारात्मक खबरें और लोग मानसिक ऊर्जा को प्रभावित करते हैं।

👉 सकारात्मक वातावरण मानसिक प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

😌 टेंशन कम करने के प्रमाणित उपाय

✔ सुबह 20–30 मिनट खुली हवा में टहलना

(रिसर्च: हल्की कार्डियो गतिविधि एंडोर्फिन बढ़ाती है)

✔ गहरी श्वास / प्राणायाम

(धीमी श्वास हृदय गति और ब्लड प्रेशर को संतुलित करती है)

✔ स्क्रीन टाइम सीमित करें

(अत्यधिक स्क्रीन उपयोग नींद और तनाव को प्रभावित करता है)

✔ 7–8 घंटे की नींद

(नींद स्मरण शक्ति और हार्मोन संतुलन के लिए आवश्यक है)

✔ काम के बीच छोटे ब्रेक

(ब्रेन फोकस 60–90 मिनट बाद घटता है — माइक्रो ब्रेक लाभदायक हैं)


 शरीर स्वस्थ रखने के जरूरी नियम

1️⃣ संतुलित खान-पान

ताजा, घर का बना भोजन

मौसमी फल और सब्जियां

अधिक तेल, चीनी और प्रोसेस्ड फूड कम

2–3 लीटर पानी (व्यक्ति अनुसार)

 संतुलित आहार इम्यून सिस्टम और पाचन को मजबूत करता है।


2️⃣ नियमित व्यायाम

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार:

👉 सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम व्यायाम आवश्यक है।

योगासन + स्ट्रेचिंग + हल्की शक्ति अभ्यास

= बेहतर लचीलापन + मजबूत मांसपेशियाँ + संतुलित हार्मोन


3️⃣ दिनचर्या (Biological Rhythm)

जल्दी सोना, जल्दी उठना

भोजन निश्चित समय पर

पाचन ठीक रखना

🔬 नियमित दिनचर्या शरीर की सर्कैडियन रिदम को संतुलित करती है।


4️⃣ मानसिक स्वच्छता

गुस्सा, ईर्ष्या, भय कम करें

हँसी और मुस्कान से डोपामिन और सेरोटोनिन बढ़ते हैं

कोई रचनात्मक शौक रखें

 आयुर्वेदिक सहायक उपाय (चिकित्सकीय सलाह के साथ)

✔ सुबह गुनगुना पानी

✔ त्रिफला (जरूरत अनुसार, डॉक्टर की सलाह से)

✔ ब्राह्मी या शंखपुष्पी (मानसिक शांति हेतु)

✔ सप्ताह में 2–3 बार सिर और पैरों में तेल मालिश करें। उत्कर्ष थेरेपी पंचकर्म प्राकृतिक चिकित्सा मर्म एक्यूप्रेशर उपचार अवश्य लें।

 

✅ डिवाइन लाईफ सॉल्युशंस:

मजबूत सोच + सही दिनचर्या + संतुलित आहार + नियमित व्यायाम = दीर्घकालिक स्वास्थ्य।

जब मन शांत होता है, तब शरीर स्वतः संतुलन की ओर बढ़ता है।

अधिक विस्तृत जानकारी मार्गदर्शन और स्वास्थ्य देखभाल उपचार थेरेपी और मनोयोग चिकित्सा परामर्श के लिए अपॉइंटमेंट लीजिए अभी संपर्क करें डॉक्टर सुरेंद्र सिंह विरहे मनोदैहिक स्वास्थ्य आरोग्य विशेषज्ञ आध्यात्मिक मनोयोग थैरेपिस्ट समग्र चिकित्सा विशेषज्ञ 

उत्कर्ष मेंटल हेल्थ केयर सॉल्युशंस एंड एंप्लॉयमेंट वेलनेस कंसलटेंसी इंस्टीट्यूट 28/6 साउथ तुकोगंज इंदौर मोबाइल 9826042177,

8989832149

Thursday, February 12, 2026

उत्कर्ष थेरेपी – दिव्य मनोयोग द्वारा हार्मोन संतुलन से नवयौवन का अनुभव 🌟

 उत्कर्ष थेरेपी – दिव्य मनोयोग द्वारा हार्मोन संतुलन से नवयौवन का अनुभव 🌟


क्या आप ऊर्जा की कमी, कमजोरी, मानसिक तनाव या पौरुष शक्ति में गिरावट महसूस कर रहे हैं?

क्या टेस्टोस्टेरॉन असंतुलन आपके आत्मविश्वास और दाम्पत्य जीवन को प्रभावित कर रहा है?


अब समाधान है — उत्कर्ष समग्र चिकित्सा मनोयोग थेरेपी


✨ हार्मोन संतुलन • नई ऊर्जा • पौरुष शक्ति • दाम्पत्य आनंद ✨


उत्कर्ष थेरेपी में प्राकृतिक एवं समग्र दृष्टिकोण से टेस्टोस्टेरॉन और अन्य हार्मोन्स के संतुलन पर कार्य किया जाता है —

✔ मानसिक स्पष्टता

✔ मांसपेशियों की मजबूती

✔ ऊर्जा और स्टैमिना

✔ यौन स्वास्थ्य और आत्मविश्वास


🌿 आहार चिकित्सा – प्राकृतिक हार्मोन सपोर्ट

डिवाइन लाईफ सॉल्युशंस की हर्बल आयुर्वेदिक औषधियाँ एवं निर्देशित शाकाहारी आहार योजना के साथ:


🥜 मैग्नेशियम व जिंक से भरपूर पोषण – हार्मोन उत्पादन में सहायक

🌰 ड्राय फ्रूट्स – ओमेगा-3 व जिंक का स्रोत

🌱 फलियों के बीज – फाइटोकेमिकल्स से हार्मोन संतुलन

🥑 एवोकाडो – हेल्दी फैट्स व विटामिन E

🍎 एंटीऑक्सीडेंट युक्त फल – रक्त प्रवाह सुधार

🌾 मिलेट्स (जई) – विटामिन B6 से ऊर्जा संतुलन

🧄 मसाले व सुपरफूड – ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कमकरते   है 

🥛 उत्कर्ष थेरेपी में निर्देशित मिल्क प्रोडक्ट्स – उच्च गुणवत्ता प्रोटीन (संतुलित मात्रा में)


🧘 मनोयोग अभ्यास और हार्मोन संतुलन

उत्कर्ष थेरेपी में योग व मनोयोग का विशेष संयोजन:


✔ संपूर्ण रक्त प्रवाह व एंडोक्राइन सिस्टम सक्रिय

✔ अधिवृक्क ग्रंथियों को संतुलित कर ऊर्जा वृद्धि

✔ पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार सुधार

✔ निर्देशित प्राणायाम – मेटाबॉलिज्म संतुलन

✔ ध्यान (Meditation) – कोर्टिसोल कम कर प्राकृतिक टेस्टोस्टेरॉन संतुलन


संतुलित आहार + नियमित योग + पर्याप्त नींद + स्ट्रेस मैनेजमेंट = स्वस्थ पुरुष शक्ति


👨‍⚕️ मनोदैहिक स्वास्थ्य आरोग्य विशेषज्ञ

आध्यात्मिक मनोयोग थेरेपिस्ट एवं लाइफ कोच

डॉ. सुरेंद्र सिंह विरहे


“सामंजस्य युक्त उत्कर्ष मनोयोग जीवनशैली ही असली स्वास्थ्य और पुरुष शक्ति का आधार है।”


📍 उत्कर्ष डिवाइन मनोयोग थेरेपी केंद्र

28/6 साउथ तुकोगंज, इंदौर, मध्य प्रदेश


📞 अपॉइंटमेंट हेतु संपर्क करें:

📲 8989832149, 9826042177


🌿 आज ही हार्मोन संतुलन थेरेपी के लिए संपर्क करें और नवयौवन, ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरपूर जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।

Sunday, February 8, 2026

गोरखमुंडी (Sphaeranthus indicus) भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा

 🌿प्रकृति में अनेक ऐसी जड़ी-बूटियाँ पाई जाती हैं, जिनके औषधीय गुणों के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ये पौधे खेतों, खाली ज़मीनों और रास्तों के किनारे आसानी से उग जाते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम इन्हें साधारण घास समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।


🔷गोरखमुंडी (Sphaeranthus indicus) भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है। इसका गुलाबी रंग का गोल फूल इसकी मुख्य पहचान है। इसके फूल, पत्तियाँ, जड़ और तना आयुर्वेद में उपयोगी माने जाते हैं। इसका स्वाद कड़वा और तीखा होता है, लेकिन इसमें मौजूद एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण इसे कई स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में अत्यंत प्रभावी बनाते हैं।


🌿 गोरखमुंडी के औषधीय उपयोग जानिए 


■ सर्दी-खांसी में उपयोगी :-

सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या में गोरखमुंडी बेहद कारगर मानी जाती है। गोरखमुंडी के गोल फूल को अदरक, तुलसी और काली मिर्च के साथ पानी में उबालकर दिन में दो बार सेवन करने से सर्दी-खांसी में राहत मिलती है और शरीर को आराम मिलता है।


■ आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक :-

आंखों के लिए गोरखमुंडी को वरदान माना जाता है। इसके पत्तों में ऐसे विशेष गुण पाए जाते हैं, जो आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करते हैं। गोरखमुंडी के पत्तों का रस निकालकर आधे गिलास पानी में मिलाकर सेवन करने से आंखें स्वस्थ रहती हैं।


■ यौन दुर्बलता दूर करें :-

यौन दुर्बलता को दूर करने के लिए भी यह पौधा बखूबी जाना जाता है। यौन दुर्बलता से बचने के लिए इसे गाय के दूध में गोरखमुंडी की जड़ का चूर्ण मिलाकर पीना काफी कारगर है। रोजाना सुबह-शाम 2 से 5 ग्राम चूर्ण यौन शक्ति को मजबूत बनाने के साथ ही यौन से जुड़ी कई अन्य समस्याओं से भी निजात दिलाता है। 


■ किडनी के लिए लाभकारी :-

गोरखमुंडी किडनी से जुड़ी बीमारियों में सहायक है। इसमें शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने की क्षमता होती है। इसके लिए दो कप पानी में गोरखमुंडी की जड़ और फूल को उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो छानकर सेवन करें। इससे किडनी से संबंधित समस्याओं में लाभ मिलता है।


■ कुष्ट रोग में फायदेमंद :-

कुष्ट रोग एक प्रकार का चर्म रोग है, यह रोग बैक्टीरिया के जरिए फैलता है। गोरखमुंडी का सेवन कुष्ट रोग के लक्षणों को दूर करता है। इस रोग में सबसे उपयोगी इसका पाउडर माना जाता है। यह रोग होने पर नीम की छाल के पाउडर के साथ गोरखमुंडी के पाउडर का एक साथ सेवन करें। इससे समस्या कम हो सकती है। 


■ हृदय के लिए लाभकारी :-

गोरखमुंडी में मौजूद औषधीय तत्व हृदय की धड़कन को मजबूत करने और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करते हैं। इसके पंचांग (जड़, तना और फूल) का काढ़ा बनाकर सेवन करने से हृदय संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है।


■ यूरिन इन्फेक्शन में राहत 

गोरखमुंडी मूत्र से जुड़ी समस्याओं जैसे पेशाब में जलन और रुकावट को दूर करने में सहायक है। इसके लिए गोरखमुंडी के पत्तों की चटनी बनाकर सेवन करने से यूरिन इन्फेक्शन और मूत्र संबंधी समस्याओं में आराम मिलता है।


■ शुगर लेवल नियंत्रित करने में मददगार :-

गोरखमुंडी शुगर लेवल को नियंत्रित करने में भी प्रभावी मानी जाती है। इसकी जड़ का चूर्ण बनाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से रक्त शर्करा संतुलित रहती है और शुगर बढ़ने की संभावना कम होती है।


✨ सावधानियाँ 


1) गोरखमुंडी का सेवन निर्धारित मात्रा में ही करें, अधिक सेवन से पेट दर्द या दस्त हो सकता हैं।


2) यदि आप गर्भवती, स्तनपान करा रही महिला या किसी गंभीर बीमारी के मरीज हैं, तो इसका उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।


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Wednesday, February 4, 2026

प्रीडायबिटीज़: शरीर की ख़ामोश चेतावनी को नज़रअंदाज़ न करें

 ⚠️ प्रीडायबिटीज़: शरीर की ख़ामोश चेतावनी को नज़रअंदाज़ न करें

Prediabetes वह अवस्था है जिसमें

👉 ब्लड शुगर सामान्य से अधिक होती है

👉 लेकिन अभी डायबिटीज़ नहीं बनी होती


📌 अच्छी खबर:

👉 यह अवस्था पूरी तरह पलटी जा सकती है (Reversible)

👉 समय रहते पहचान और सही जीवनशैली से

Type-2 Diabetes, Heart Disease, Nerve Damage से बचा जा सकता है


❗ क्यों खतरनाक है प्रीडायबिटीज़?

🔕 अधिकतर मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं

इसलिए इसे कहा जाता है Silent Condition

लेकिन शरीर धीरे-धीरे संकेत देने लगता है…


🔍 प्रसिद्ध मनोदैहिक स्वास्थ्य आरोग्य विशेषज्ञ आध्यात्मिक मनोयोग थैरेपिस्ट डॉक्टर सुरेंद्र सिंह विरहे के शोध में बताया गया है कि प्रीडायबिटीज़ के शुरुआती चेतावनी संकेत क्या क्या होते हैं आइए जानते हैं:

1️⃣ मेटाबॉलिक व वजन से जुड़े संकेत

➡️ पेट के आसपास चर्बी बढ़ना (Central Obesity)

➡️ डाइट और व्यायाम के बावजूद वजन कम न होना

🔬 Visceral Fat = Insulin Resistance का मजबूत संकेत


2️⃣ ऊर्जा की कमी

➡️ लगातार थकान

➡️ खाने के बाद सुस्ती

(ग्लूकोज़ कोशिकाओं तक पहुँचता है, पर उपयोग नहीं हो पाता)


3️⃣ ब्लड शुगर से जुड़े लक्षण

➡️ बार-बार प्यास लगना

➡️ बार-बार पेशाब आना


4️⃣ त्वचा के संकेत

➡️ गर्दन/बगल पर काली त्वचा (Acanthosis Nigricans)

➡️ घाव देर से भरना


5️⃣ दिमाग व नसों के संकेत

➡️ ध्यान न लगना, Brain Fog

➡️ हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन


6️⃣ हृदय से जुड़े संकेत

➡️ बढ़ता ब्लड प्रेशर

➡️ कोलेस्ट्रॉल असंतुलन

🔬 Prediabetes = Heart Disease का पूर्व संकेत


🧪 प्रीडायबिटीज़ की पुष्टि कैसे होती है?

⚠️ लक्षण नहीं, जांच निर्णायक होती है


✔️ Fasting Sugar: 100–125 mg/dL

✔️ HbA1c: 5.7% – 6.4%

✔️ OGTT (2 घंटे): 140–199 mg/dL


❓ प्रीडायबिटीज़ क्यों होता है?

➡️ इंसुलिन रेजिस्टेंस

➡️ पेट की चर्बी / अधिक वजन

➡️ शारीरिक निष्क्रियता

➡️ अधिक मीठा व रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट

➡️ पारिवारिक इतिहास

➡️ PCOS (महिलाओं में)

➡️ लगातार तनाव व खराब नींद


⏰ समय पर पहचान क्यों ज़रूरी?

📊 शोध बताते हैं—

👉 बिना जीवनशैली सुधार के

👉 5–7 वर्षों में अधिकांश लोग Type-2 Diabetes की ओर बढ़ते हैं


🌱 सकारात्मक तथ्य:

👉 प्रीडायबिटीज़ को

उत्कर्ष समग्र थेरेपी व मनोयोग जीवनशैली द्वारा

पलटा जा सकता है


🧘‍♂️ रोकथाम व प्रबंधन (Prevention & Management)

✔️ रोज़ 30–45 मिनट शारीरिक गतिविधि

✔️ संतुलित आहार, कम चीनी

✔️ 5–7% वजन कम करना

✔️ पर्याप्त नींद

✔️ तनाव नियंत्रण (मनोयोग)

✔️ नियमित ब्लड शुगर जांच


⚠️ कुछ मामलों में दवा आवश्यक हो सकती है — केवल चिकित्सक की सलाह से


🔑 मुख्य संदेश (Key Takeaway)

⚠️ प्रीडायबिटीज़ बिना शोर के आता है

लेकिन शरीर पहले चेतावनी देता है —

👉 पेट की चर्बी

👉 थकान

👉 गर्दन की काली त्वचा

👉 बार-बार पेशाब

👉 ध्यान की कमी


🧪 पुष्टि केवल ब्लड टेस्ट से होती है

⏳ समय रहते सही जीवनशैली अपनाएँ

🚫 Type-2 Diabetes को रोका जा सकता है


📍 जाँच व परामर्श हेतु संपर्क करें

डॉ. सुरेंद्र सिंह विरहे

मनोदैहिक स्वास्थ्य आरोग्य विशेषज्ञ

आध्यात्मिक मनोयोग थैरेपिस्ट | लाइफ कोच


🏥 उत्कर्ष थेरेपी केंद्र

28/6, साउथ तुकोगंज, इंदौर


📞 9826042177 | 8989832149

Monday, February 2, 2026

वेरिकोस वेन्स (Varicose Veins):-नसों की सूजन का साइलेंट खतरा

 वेरिकोस वेन्स (Varicose Veins):-नसों की सूजन का साइलेंट खतरा!🙋


वेरीकोजवेन्स VaricoseVeins उत्कर्ष मनोयोग थेरेपी आयुर्वेदिक उपचार 


🙋दोस्तों वेरिकोस वेन्स केवल पैरों की उभरी, नीली नसें नहीं हैं।

💁‍♂️यह शरीर का एक गंभीर संकेत है कि रक्त सही दिशा में नहीं बह रहा।

अक्सर लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न दिया जाए तो दर्द, सूजन और जटिलताएँ बढ़ सकती हैं।


💁‍♂️ वेरिकोस वेन्स क्या होती हैं?


💁‍♂️हमारी नसों में मौजूद वाल्व खून को ऊपर (दिल की ओर) ले जाते हैं।

जब ये वाल्व कमजोर हो जाते हैं, तो खून नीचे रुकने लगता है👉

➡️ नसें फूल जाती हैं

➡️ नीली, टेढ़ी-मेढ़ी दिखने लगती हैं

👉 इसी स्थिति को Varicose Veins कहते हैं।


⚠️ वेरिकोस वेन्स के मुख्य कारण:-💁‍♂️


🧬 जेनेटिक कारण (परिवार में किसी को हो)


🧍‍♂️ लंबे समय तक खड़े या बैठे रहना


⚖️ अधिक वजन / मोटापा


🤰 गर्भावस्था (हॉर्मोनल बदलाव)


🩸 कमजोर रक्त प्रवाह या पुराने ब्लड क्लॉट


📢 वेरिकोस वेन्स के लक्षण:-


पैरों में भारीपन या सूजन


उभरी हुई, नीली या टेढ़ी-मेढ़ी नसें


जलन, दर्द या झनझनाहट


रात में पैरों में ऐंठन


त्वचा का रंग बदलना या खुजली

आयुर्वेद में वेरिकोस वेन्स को “Siragranthi” या “Siravikriti” कहा गया है।
यह स्थिति वात दोष बढ़ने से होती है, जिससे नसों की लचीलापन और रक्त प्रवाह प्रभावित होता है।

 उत्कर्ष थेरेपी का लक्ष्य होता है —

वात को संतुलित करना

रक्त संचार सुधारना

सूजन और दर्द कम करना

दिव्य  मनोयोग उत्कर्ष थेरेपी उपचार से 
बेहतर रक्त प्रवाह और मांसपेशियों की मज़बूती से वैरिकाज़ नसों का खतरा कम हो सकता है। वैरिकाज़ नसों से होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए आप जब उत्कर्ष  थेरेपी का इस्तेमाल करते हैं, उन्हीं थेरेपी चिकित्सा तरीकों से इन्हें होने से रोका जा सकता है
अधिक विस्तृत जानकारी मार्गदर्शन और स्वास्थ्य देखभाल रोग उपचार परामर्श थेरेपी चिकित्सा के लिए संपर्क करें डॉक्टर सुरेंद्र सिंह विरहे मनोदैहिक स्वास्थ्य आरोग्य विशेषज्ञ आध्यात्मिक मनोयोग थैरेपिस्ट हेल्थ केयर लाईफ कोच
उत्कर्ष मेंटल हेल्थ केयर सॉल्युशंस एंड एंप्लॉयमेंट वेलनेस कंसलटेंसी इंस्टीट्यूट 28/6 साउथ तुकोगंज इंदौर 
9826042177

मनोयोग उत्कर्ष थेरेपी द्वारा सकारात्मक सोच मजबूत करें और जीवन में शांति आ आनंद संतुलन लाएँ।

मनोयोग उत्कर्ष थेरेपी द्वारा सकारात्मक सोच मजबूत  करें और जीवन में शांति आ आनंद संतुलन लाएँ। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई स...