Thursday, September 15, 2022

मानवता खतरें में आ गई हैं ? आध्यात्मिक विश्वगुरु भारत ही शान्ति समाधान का केन्द्र

वर्तमान वैश्विक घटनाक्रम एवम देशों के बीच आपस में युद्ध उन्माद शत्रुता के कारण 

मानवता खतरें में आ गई हैं

सावधान हो सजग होकर विश्व शांति सुरक्षा व्यवस्था बनाने में जुटना होगा । परमाणु शस्त्रों की प्रतिस्पर्धा को रोकना होगा। अन्यथा विश्व का विनाश निश्चित है।


धरती पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों,ऊर्जा,खनिज एवम खाद्यान की कमी तेजी से बढ़ रही हैं। अर्थात् समूचे विश्व में

जीवन अनुकूलन अनिश्चित होता जा रहा है। मानवीयता का पतन बढ़ता जा रहा है।

घोर असुरक्षा व अस्तित्व को बचाए रखने की चुनौतियां दिन प्रतिदिन तेजी से बढ़ रही हैं। 


विश्व के कई देशों में परस्पर  प्राकृतिक संसाधनों पर आधिपत्य स्थापित करने की होड़ मची हुई हैं।जिसके कारण उनके बीच शक्ति प्रदर्शन एवम आर्थिक साम्राज्यवादी सोच हावी होती जा रही हैं।भविष्य की अनिश्चित प्रतिकूलता की आशंका के कारण देशों में भावी रणनीति संबंधित चुनौतियों और  रक्षा हितों में टकराव  के कारण शीत युद्ध के हालातों से बढ़ कर छदम लड़ाइयां अब भीषण युद्ध का रूप लेती चली जा रही हैं।

वर्तमान में विगत 50 दिनों से जारी रूस यूक्रेन की विध्वंसक जंग के चलते दुनिया के विनाश की शुरुआत हो चुकी हैं।


तृतीय विश्व युद्ध के संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जैविक रासायनिक हथियारों सहित परमाणु बम के इस्तमाल की तैयारियां अपने चरम पर है।


ऐसे में पूरी दुनिया को केवल भारत ही बचा सकता है।

विश्व आध्यात्मिक गुरु भारत की भूमिका आज भयाक्रांत  विश्व के लिए शांति दूत बनकर "वशुधेव कुटुम्बकम" को चरितार्थ करने "अहिंसा परमो धर्म "का संदेश समूचे विश्व में पुनः फैलाने की है।

मनोदैहिक आरोग्य और चिकित्सा के क्षेत्र में भारतीय मनोवैज्ञानिकों के विचार लंबी सांस्कृतिक परंपराओं और हजारों सालों के अनुभवों पर आधारित है। उपनिषद ग्रंथों में मानव चेतना की दषाओं की विस्तृत चर्चा की गई है। चित्त के स्वरूप और चित्तवृत्ति निरोध चित्त की दषाओं आदि पर महर्षि पतंजलि ने अपने योग सूत्रों में व्यापक प्रकाष डाला है।


अखंड भारत वास्तव में प्रेम सौहार्द शांति भाईचारे से स्थापित होगा ना कि हिंसा युद्ध उन्माद की अंधी दौड़ में शामिल होने से।

वैश्विक स्तर पर भारतीय संदर्भ में दार्शनिक ज्ञान को बढ़ावा देने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों और ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत या प्रासंगिकता के संरक्षण के अनुरूप 21वीं सदी की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए नए शोध और समाधान, नए विचार पेश करके सनातन मूल्य और नए विकल्प खोजना इस उत्कर्ष का लक्ष्य होगा।

आज पूरी दुनिया भारत की ओर सत्य पक्षधर , सौहार्द संरक्षक, करुणा , दया ,दाता निष्पक्ष ,न्याय संगत नेतृत्वकारी राष्ट्र के रूप देख रही है। यही सही समय है कि हम आध्यात्मिक गुरु होने की अपनी असली भूमिका का निर्वाह करें।शांति स्थापना हेतु वैश्विक पहल एवम परस्पर शांति संवाद स्थापित करने में मध्यस्थ बनें।

 विश्व को संकट से विनाश से बचाएं।आने वाली नई पीढ़ी को अहिंसा , शांति  एवम मानवता की रक्षा का मूल मंत्र देकर प्रेम बंधुत्व करुणा के महत्व को वशुधेव कुटुंबकम रूपेण सिद्ध कराएं।

डा सुरेंद्र सिंह विरहे

आध्यात्मिक योग थेरेपिस्ट लाईफ कोच

रिसर्च स्कॉलर

भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद नई दिल्ली

स्थापना सदस्य

मध्य प्रदेश मेंटल हेल्थ एलायंस

उप निदेशक

मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी संस्कृति परिषद संस्कृति विभाग भोपाल मध्य प्रदेश

09826042177

08989832149

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