Thursday, September 15, 2022

जीवन महान अवसर बन सकता है आत्मिक शक्ति जागृति प्राप्त करें

 जीवन महान अवसर बन सकता है 

आत्मिक शक्ति जागृति प्राप्त करें !

आओ हम सभी सार्थक जीवन उत्कर्ष की ओर अग्रसर हो आध्यात्मिक और पारमार्थिक गतिविधियाँ अपनाकर जीवन के आने वाले समय को सार्थक बनाकर कोरोनाकाल के सबक से अपने अंदर नए सिरे महत्वपूर्ण बदलाव लाने हेतु तत्पर हो अपने जीवन के उत्तरार्द्ध को सार्थक, उद्देश्यपूर्ण , गुणवत्ता युक्त एवम् अनमोल अवसर के रूप में बनाने में जुट जाएं।

 शेष जीवन को सच्चे अर्थों में सफ़ल और सार्थक बनाया जा सकता हैं, मानों हमने नया जन्म लिया है। मनुष्य रूप में जिस प्रयोजन के लिए यह शरीर मिला है, अर्थात् मानव जन्म का जो परम लक्ष्य है वह अब तक पूर्वार्द्ध में प्रपंचवश मूर्छा घमंड, भोग तृष्णा के कारण पुरा नहीं हो  सका है। 

मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने के इस दौर में सकारात्मक सोच को अपनाएं। कोरोना महामारी की आपदा विपदा से सबक लेकर स्वयं और परिवार का महत्व, समाज के प्रति परोपकार एवम् राष्ट्र की निःस्वार्थ  सेवा हेतु समर्पित हो अपनी मनुष्यता की दिव्यता, महानता सिद्ध करें । 

*आत्मिक शक्ति से रोग प्रतिरोधक क्षमता इम्यूनिटी में वृद्धि करके जागृति प्राप्त करें

आत्मिक शक्ति से रोग प्रतिरोधक क्षमता इम्यूनिटी में वृद्धि करके कोविड संक्रमण ओमिक्रोन डेल्टा जैसे वायरस से बचाव संभव है।

बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता से ही हम बीमारी से बच सकते हैं। योग विद्या की मान्यता के अनुसार शरीर खुद एक बेहतर डॉक्टर है। आत्मबल रोग प्रतिरोधक क्षमता और स्वत: ठीक होने की क्षमता को विकसित करने के लिए योग महत्वपूर्ण साधन है।  

 योग का अभ्यास शारीरिक मानसिक, सामाजिक, आध्यात्मिक स्तर को विकसित करता है। इससे रक्त संचार, पाचन, पोषण, श्वसन से संबंधित क्रियाएं सुचारू रूप से चलने लगती हैं।

सूर्य नमस्कार से बढ़ती है क्षमता। सूर्य नमस्कार के अभ्यास से शरीर के सभी प्रमुख अंग जैसे-फेफड़े, किडनी, हृदय, मस्तिष्क, लिवर की कार्यप्रणाली अच्छी हो जाती है, जिससे शरीर में बाहर के संक्रमण से लड़ने की क्षमता जागृत हो जाती है। शुरुआत में इसका पांच राउंड अभ्यास करना चाहिए। बाद में अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास बढ़ाना चाहिए।  योग विद्या के अनुसार मुद्रा के अभ्यास से मन पर नियंत्रण तथा इम्युनिटी विकसित होती है, जिनमें ज्ञान मुद्रा और काकी मुद्रा का अभ्यास होता है।

इम्युनिटी बढ़ाते हैं योग के सभी आसन।

योग के सभी आसन इम्युनिटी बढ़ाते हैं। उनका नियमित अभ्यास करने वालों को कोरोना का डर नहीं रहेगा। 

 इम्युनिटी बढ़ाने के लिए प्राणायाम, भस्तिका, कपालभांति,अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, भुजंग,गोमुख आसन, सर्वांग आसन, हलासन, भारद्वाज आसन, पाद आसन, त्रिकोण आसन सहायक हैं, इनका नियमित अभ्यास करना चाहिए।

संतुलित आहार-विहार से भी बढ़ेगी प्रतिरोधक क्षमता।

कोरोना या अन्य संक्रमण से बचाव में किसी भी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 संतुलित आहार-विहार से कोई भी व्यक्ति अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकता है। इसके लिए सूर्योदय के पहले उठे। नित्यक्रिया के बाद गुनगुने पानी से गरारा करें। यदि सूखी खांसी हो तो सेंधा नामक और गाय का घी मिलाकर पीठ और सीने पर हल्के हाथ से मालिश करें। सुबह गिलाए का काढ़ा बनाकर पिएं। हल्दी, काली मिर्च, सौंफ, अजवायन, मेंथी, धनिया, आंवला, सोंठ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। इस आहर विहार से इम्यून सिस्टम मजबूत होता जाएगा।

*_नियमित करे योग हमेशा रहे निरोग*

आध्यात्मिक स्वास्थ्य मनोदैहिक आरोग्य अभिधेय को आत्मसात कर परमार्थ की पुण्य पूँजी संग्रह करने के लिए, अगले जन्म में ऊँची स्थिति पाने के लिए स्वयं भी उत्कंठा जाग्रत करें एवम् अन्य मित्र, सखा, स्नेही परम प्रिय जनों को भी प्रेरित करें। संवेदनशील बनकर और अधिक गम्भीरतापूर्वक दिव्य जीवन की प्रेरणाओं सीखें । परोपकार सेवा गतिविधियों को अपनाकर इस अनमोल मानव जीवन को सार्थक करें। कोरोनाकाल हमारे जीवन में आपदा से बढ़कर महान अवसर सबक दे सकता है..

मानव जीवन के चार पुरुषार्थ यथा धर्म (सदाचार या कर्त्‍तव्‍य), अर्थ(सांसारिक उपलब्धि, मुख्‍य रूप से समृद्ध), काम (सद इच्‍छाओं की पूर्ति), और मोक्ष (मुक्ति)आ को किस प्रकार से प्राप्‍त किया जाए । 

विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,

मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी।

हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,

मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।

वही पशु प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे,

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे॥

(मैथिलीशरण गुप्त)

उस आदमी का जीना या मरना अर्थहीन है जो अपने स्वार्थ के लिए जीता या मरता है। जिस तरह से पशु का अस्तित्व सिर्फ अपने जीवन यापन के लिए होता है, मनुष्य का जीवन वैसा नहीं होना चाहिए। ऐसा जीवन जीने वाले कब जीते हैं और कब मरते हैं कोई ध्यान ही नहीं देता है। हमें दूसरों के लिए कुछ ऐसे काम करने चाहिए कि मरने के बाद भी लोग हमें याद रखें। साथ में हमें ये भी अहसास होना चाहिए कि हम अमर नहीं हैं। इससे हमारे अंदर से मृत्यु का भय चला जाता है।

डा सुरेन्द्र सिंह विरहे 

मनोदैहिक आरोग्य एवम् आध्यात्मिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ

आध्यात्मिक योग  थेरेपिस्ट लाईफ कोच

उप निदेशक मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी संस्कृति परिषद् भोपाल

शोध समन्वयक

नैतिक मूल्य आध्यात्मिक शिक्षा शोध

धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग मध्य प्रदेश शासन

9826042177,8989832149

No comments:

Post a Comment

प्रेम की बेबसी

 प्रेम की तडपन प्रेम की बेबसी  कितना आसान है किसी पुरुष का एक स्त्री से प्रेम कर लेना, और कुछ वक्त साथ बिताकर उसे भूल भी जाना! पुरुष के लिए ...