स्वस्थ भारत निर्माण संकल्प से विकसित आत्मनिर्भर दिव्य भव्य भारत की बुनियाद बनें।
आइए हम सब आगामी नव वर्ष की शुरुआत पर भारत को स्वस्थ और खुशहाल बनाने का संकल्प लें।
भारत के स्वास्थ्य विषयक आंकड़े चिंताजनक है खासतौर पर मानसिक स्वास्थ्य के आंकड़े अत्यंत गंभीर व चिंताजनक है ।
स्वास्थ्य में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए जन गण मन में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता स्वस्थ रहने हेतु प्रेरित करने की नितांत आवश्यकता है।
आज की बेहद व्यस्त जीवनशैली में कई स्वास्थ्य समस्याएं मानसिक और शारीरिक तनाव का कारण बनती हैं। उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ और अवसाद जैसे मानसिक विकार काफी बढ़ रहे हैं।
नियमित स्वास्थ्य मूल्यांकन के साथ, इन्हें प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना और बाद में शारीरिक, मानसिक और सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय तनाव से बचाना आसान होता है।
भारत में स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे
WHO के आँकड़ों के अनुसार:
देश में अनुमानत: 150 मिलियन लोगों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता है।
60 वर्ष से कम आयु के पुरुषों में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के कारण मृत्यु 38.0% है
60 वर्ष से कम आयु की महिलाओं में एनसीडी के कारण मृत्यु दर 32.1% है
कैंसर, दीर्घकालिक श्वसन रोग, हृदय रोग, मधुमेह आदि जैसे एनसीडी के लिए मृत्यु दर पुरुषों में प्रति 100,000 पर 781.7 और महिलाओं में 571.0 प्रति 100,000 है।
क्योंकि नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, लगभग 80% मौतें एनसीडी (गैर-संचारी रोग) के कारण होती हैं और भारत में विश्व स्तर पर मधुमेह रोगियों की संख्या सबसे अधिक है।
भारत स्वस्थ और खुशहाल कैसे होगा?
भारत के स्वास्थ्य में सुधार के लिए कुछ कदम हैं:
रोकथाम स्वास्थ्य जांच अप्रत्याशित स्वास्थ्य देखभाल खर्चों से बचने का सबसे आसान तरीका है
समय पर टीकाकरण
स्वस्थ जीवनशैली और स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के बुनियादी मानकों को बनाए रखना
भारतीय अर्थव्यवस्था की तीव्र गति के परिणामस्वरूप काम के लंबे घंटों के कारण तनाव, शारीरिक व्यायाम की कमी, अधिकतम नींद और अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों के कारण जीवनशैली संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हुई हैं। ऐसे में योग और ध्यान अद्भुत काम करते हैं।
संगठनों को आवश्यक स्वास्थ्य और कल्याण पहल को प्राथमिकता के आधार पर समझना और लेना चाहिए और एक स्वस्थ कार्य संस्कृति के लिए प्रयास करना चाहिए।
आज के इस भागमभाग भोगवादी उपभोक्ता बाजारवादी कुसंस्कृति के इस दौर में मानसिक स्वास्थ्य के बिगड़ने के लक्षणों पर ध्यान केंद्रित करना अत्यन्त आवश्यक है, जैसे कि तनाव, अवसाद, नींद की कमी, अनावश्यक चिंता, रुचि की हानि और आत्मविश्वास में कमी।
दिव्य जीवन समाधान उत्कर्ष संस्थान स्वस्थ भारत मिशन में विगत दो दशक से सक्रिय भूमिका निभा रहा है इसके साथ ही, यह मनोदैहिक आरोग्य अभियान में अग्रणी भूमिका में है यह अभियान स्वस्थ भारत समर्थन और जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य रखता है।
मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों के प्रति जागरूक बनें निम्न लिखित लक्षणों के प्रति सचेत रहें:
रात को अच्छी नींद ना आना।
दिनभर अनावश्यक विचार चलते रहना।
बेवजह की चिंता और घबराहट महसूस होना।
मन का उदास रहना
आत्मविश्वास में लगातार गिरावट महसूस करना।
किसी भी काम में मन ना लगना। और छोटे-छोटे काम को कल पर टालना।
हमेशा नकारात्मक पहलू नजर आना।
अच्छा खाना खाने के बावजूद लगातार वजन का कम होना।
अपने पसंदीदा कामों और रतिक्रिया में रुचि खो देना।
अत्यंत छोटी-छोटी बातों पर बहुत गुस्सा करना और झुंझलाहट महसूस होना
स्वास्थ्य परामर्श ,रोग निदान समस्या समाधान हेतु संपर्क करें:
डा सुरेंद्र सिंह विरहे
मनोदैहिक आरोग्य विशेषज्ञ
आध्यात्मिक योग थेरेपिस्ट लाईफ कोच
09826042177
08989832149
https://youtube.com/@divine177
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